अदालती आश्वासन का उल्लंघन गंभीर अवमानना: सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक संशोधन के साथ अवमानना ठहराई

Smt. Lavanya C & Anr. v. Vittal Gurudas Pai (Since Deceased) by LRs & Ors. [2025] 3 S.C.R. 450 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि यदि कोई पक्ष न्यायालय को वकील के माध्यम से कोई आश्वासन देता है और उसे न्यायिक आदेश का रूप दे दिया जाता है, तो उसका […]

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बिना पर्याप्त कारण के निरोध आदेश असंगत: सुप्रीम कोर्ट ने COFEPOSA के तहत हिरासत को रद्द किया

Joyi Kitty Joseph v. Union of India & Ors.[2025] 3 S.C.R. 419 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को COFEPOSA अधिनियम, 1974 की धारा 3(1)(i) से (iv) के तहत निरुद्ध करते समय प्रशासनिक प्राधिकारी को यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि क्यों पूर्व में दी गई ज़मानत की शर्तें […]

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विशेष आवश्यकता वाले बालक की संरक्षकता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अमेरिकी नागरिक मां को सौंपा गया बच्चा

Sharmila Velamur v. V. Sanjay and Ors.[2025] 3 S.C.R. 377 सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षकता विवाद में यह स्पष्ट किया कि यदि कोई बच्चा गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति से पीड़ित है और स्वतंत्र निर्णय लेने में अक्षम है, तो उसकी संरक्षकता का निर्धारण उसकी सर्वोत्तम भलाई के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि […]

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विवाह के दो वर्षों में पत्नी की संदिग्ध मृत्यु: सुप्रीम कोर्ट ने सास-ससुर की जमानत रद्द की

Shabeen Ahmad v. The State of Uttar Pradesh & Anr.[2025] 3 S.C.R. 367 सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि यदि विवाह के दो वर्षों के भीतर पत्नी की मृत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में हो और आरोप दहेज की मांग तथा क्रूरता से संबंधित हों, तो ऐसे मामलों में अभियुक्तों को जमानत प्रदान […]

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बिना लाइसेंस फैक्ट्री संचालन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कपड़े धोने की इकाई भी फैक्ट्री मानी गई

The State of Goa & Anr. v. Namita Tripathi[2025] 3 S.C.R. 341 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई परिसर विद्युत शक्ति की सहायता से चलाया जा रहा हो और उसमें नौ से अधिक श्रमिक कार्यरत हों, तो वह स्थान ‘फैक्ट्री’ की कानूनी परिभाषा में आएगा, भले ही वह केवल […]

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आईबीसी मोराटोरियम उपभोक्ताअधिकारों पर लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता अधिकारों को दी प्राथमिकता

Saranga Anilkumar Aggarwal v. Bhavesh Dhirajlal Sheth & Ors.[2025] 3 S.C.R. 325 सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 27 के तहत लगाया गया दंड, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 96 के तहत लागू अंतरिम स्थगन (moratorium) की सीमा में नहीं आता। […]

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मृत्युकथन में विरोधाभास और पुष्टिकारी साक्ष्य के अभाव में आरोपी दोषमुक्त: सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

Suresh v. State Rep. by Inspector of Police[2025] 3 S.C.R. 317 सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि मृत्युकथन (dying declaration) के आधार पर दोषसिद्धि केवल तभी टिकाऊ मानी जा सकती है जब वह सुसंगत, पुष्ट और स्वतंत्र साक्ष्यों द्वारा समर्थित हो। यह मामला एक ऐसी महिला की मृत्यु से जुड़ा था, […]

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विवाह के झूठे वादे का आरोप अस्वीकार: सुप्रीम कोर्ट ने प्रेम संबंध मानते हुए प्राथमिकी रद्द की

Rajnish Singh @ Soni v. State of U.P. and Another[2025] 3 S.C.R. 303 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई शिक्षित बालिग महिला वर्षों तक सहमति से संबंध बनाए रखती है, तो बाद में विवाह के झूठे वादे के आधार पर लगाए गए बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों को स्वतः स्वीकार […]

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न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई बने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

14 मई 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई गई। यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचने वाले पहले बौद्ध और केवल दूसरे दलित […]

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सुप्रीम कोर्ट का  हालिया ऐतिहासिक निर्णय जिसने संविधान के अनुच्छेद 31C और अनुच्छेद 39(b) की व्याख्या को एक नई दिशा दी

[2024] 11 S.C.R. 1 : 2024 INSC 835 Property Owners Association & Ors. v. State of Maharashtra & Ors. (Civil Appeal No. 1012 of 2002) 05 November 2024 पहला मुद्दा: क्या अनुच्छेद 31C अभी भी प्रभावी है? सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को Property Owners Association बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में एक ऐतिहासिक फैसला […]

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