नई दिल्ली, 28 मार्च 2025 – दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्त्वपूर्ण फैसले में कहा कि रेस्टोरेंट और होटलों द्वारा ग्राहकों से सर्विस चार्ज लेना अनिवार्य नहीं है, यह पूरी तरह स्वैच्छिक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह जबरन शुल्क वसूलना एक अनुचित व्यापारिक प्रथा के अंतर्गत आता है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों की ओर से दायर की गई याचिकाएं खारिज कर दीं, जो केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा वर्ष 2022 में जारी दिशा-निर्देशों को चुनौती दे रही थीं।

मुख्य बिंदु:
– कोर्ट ने कहा कि ग्राहकों को साफ-साफ बताया जाना चाहिए कि सर्विस चार्ज देना वैकल्पिक है।
– CCPA को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निर्देश जारी करने का अधिकार है और यह सिर्फ सलाह देने वाली संस्था नहीं है।
– कोर्ट ने याचिकाकर्ता रेस्टोरेंट संगठनों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
के दिशा-निर्देश क्या कहते हैं?
2022 में जारी निर्देशों में कहा गया था कि रेस्टोरेंट न तो सर्विस चार्ज को ऑटोमेटिक रूप से बिल में जोड़ सकते हैं, और न ही इसे किसी और नाम से छुपाकर ले सकते हैं।
कोई उपभोक्ता यदि सर्विस चार्ज नहीं देना चाहता, तो उसे सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने से उपभोक्ता को यह भ्रम होता है कि वह सर्विस टैक्स या जीएसटी का भुगतान कर रहा है, जो कि गलत है।
रेस्टोरेंट एसोसिएशन की दलीलें हुईं खारिज
रेस्टोरेंट संगठनों ने दलील दी थी कि CCPA की गाइडलाइंस मनमानी हैं और उन्हें सरकारी आदेश नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि CCPA के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।