वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024

भारतीय कानून

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024: वक्फ संपत्तियों की निगरानी और धार्मिक स्वायत्तता पर बहस तेज

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट | अप्रैल 2025

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 ने देशभर में वक्फ संपत्तियों के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विधेयक वर्तमान वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करके वक्फ परिषद, राज्य वक्फ बोर्डों, ट्रिब्यूनल संरचना, संपत्ति सर्वेक्षण, और कानूनी प्रक्रिया में कई अहम परिवर्तन प्रस्तावित करता है।

प्रमुख परिवर्तन और प्रावधान

1. गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य 

   अब केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। इससे परिषद में मुस्लिम सदस्य बहुमत में नहीं रह सकते, जबकि अन्य धार्मिक बोर्ड (जैसे हिन्दू और सिख बोर्ड) में बहुसंख्यक उसी धर्म के लोग होते हैं।

2. वक्फ घोषित करने के लिए ‘कम से कम 5 साल से मुस्लिम होना’ आवश्यक 

   यह प्रावधान समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि इससे नव-धर्मांतरित मुस्लिमों को वक्फ स्थापित करने से वंचित किया जा सकता है।

3. ‘वक्फ बाय यूजर’ का अंत 

   लंबे समय तक धार्मिक उपयोग के आधार पर वक्फ घोषित संपत्तियों को अब यह दर्जा नहीं मिलेगा। यह निर्णय पूर्व में अस्तित्व में आई संपत्तियों की स्थिति पर अस्पष्टता पैदा करता है।

4. सरकारी भूमि अब वक्फ नहीं मानी जाएगी 

   यदि कोई वक्फ संपत्ति सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पाई जाती है, तो वह अब वक्फ नहीं मानी जाएगी। जिलाधीश ही अब अंतिम निर्णयकर्ता होंगे।

5. मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अब मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं 

   वर्तमान में यह पद मुस्लिम अधिकारियों के लिए आरक्षित है, परंतु विधेयक इस अनिवार्यता को समाप्त करता है।

6. वक्फ ट्रिब्यूनल से मुस्लिम विधि विशेषज्ञ की अनिवार्यता समाप्त 

   अब ट्रिब्यूनल में मुस्लिम कानून का कोई विशेषज्ञ नहीं होगा, जबकि वक्फ विवादों में शरीयत की समझ अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

7. ट्रिब्यूनल के निर्णय अब हाईकोर्ट में चुनौती योग्य 

   पहले ट्रिब्यूनल के फैसले अंतिम माने जाते थे। अब 90 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी, जिससे वक्फ मामलों में न्यायिक समीक्षा की संभावना बढ़ेगी।

संवैधानिक और सामाजिक चिंताएँ

– अनुच्छेद 26 का उल्लंघन? 

  धार्मिक समुदायों को अपने धार्मिक मामलों का संचालन स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार संविधान में प्रदत्त है। इस विधेयक में गैर-मुस्लिम बहुमत वाली वक्फ परिषदें इस अधिकार का हनन कर सकती हैं।

– अनुच्छेद 14 का प्रश्न 

  “5 वर्ष से मुस्लिम” प्रावधान समानता और धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जा रहा है, क्योंकि इससे नव-धर्म परिवर्तन करने वालों के साथ भेदभाव होता है।

वक्फ संपत्तियों का राष्ट्रीय परिदृश्य

भारत में लगभग 8.7 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियाँ हैं। इनमें 7% अतिक्रमण के अंतर्गत हैं और 2% पर मुकदमेबाज़ी चल रही है। उत्तर प्रदेश (27%), पश्चिम बंगाल (9%) और पंजाब (9%) शीर्ष स्थानों पर हैं। अधिकतर संपत्तियाँ कब्रिस्तान, कृषि भूमि, मस्जिदें और दुकानें हैं।

यह विधेयक फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही इसके भविष्य पर निर्णय होगा।

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