प्रेस और आवधिक प्रकाशनों का पंजीकरण अधिनियम, 2023: आवश्यकता, प्रावधान और प्रासंगिक चिंताएँ

विधिक समाचार

भारत में मीडिया के नियमन और समाचार प्रकाशनों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु प्रेस और पंजीकरण से संबंधित कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। वर्ष 1867 के Press and Registration of Books Act के स्थान पर लाया गया The Press and Registration of Periodicals Act, 2023 एक आधुनिक, तकनीक-सम्मत और अधिक उत्तरदायी विधायी प्रयास है, जो पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखता है।

इस अधिनियम की आवश्यकता इसलिए भी बनी क्योंकि पुराना कानून उपनिवेशकालीन था और डिजिटल प्रकाशन, विदेशी फेक्सीमाइल संस्करणों, ऑनलाइन समाचार पोर्टलों जैसे नए माध्यमों पर मौन था। इसके अतिरिक्त, पत्रकारिता से जुड़े मामलों में पंजीकरण, स्वामित्व स्थानांतरण, प्रकाशन अधिकार जैसे विषयों पर स्पष्टता और केंद्रीकृत नियंत्रण की आवश्यकता थी, जिससे गलत सूचना, छद्म पहचान और गैर-पंजीकृत प्रकाशनों की समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।

प्रेस और पंजीकरण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत भारत में किसी भी आवधिक प्रकाशन के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए प्रेस रजिस्ट्रार जनरल को केंद्रीय प्राधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने, शीर्षक की जांच करने, प्रकाशनों का रिकॉर्ड रखने तथा आवधिक वार्षिक विवरण प्राप्त करने का कार्य करेगा। धारा 7 के अनुसार, किसी भी पत्रिका, समाचार पत्र या अन्य प्रकाशन को तभी प्रकाशित किया जा सकता है जब उसके लिए वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त हो। प्रकाशक को प्रिंटर, संपादक और प्रकाशन स्थान का उल्लेख प्रकाशन पर स्पष्ट रूप से करना होगा।

प्रेस रजिस्ट्रार जनरल को यह अधिकार दिया गया है कि वह झूठी जानकारी पर आधारित पंजीकरण को निलंबित या रद्द कर सके। साथ ही, जो प्रकाशन 12 माह के भीतर शुरू नहीं होते, उन्हें भी रद्द किया जा सकता है। धारा 11 में इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और दोषियों को सुनवाई का अवसर मिले। वहीं, यदि कोई व्यक्ति बिना पंजीकरण के प्रकाशन जारी रखता है, तो उस पर आर्थिक दंड के साथ छह माह तक की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

हालांकि अधिनियम का उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करना नहीं है, फिर भी इसमें कुछ प्रावधान जैसे आतंकवाद या राज्य विरोधी गतिविधियों के आरोपी को प्रकाशन की अनुमति न देना, चिंताजनक हो सकते हैं क्योंकि इन धाराओं के दुरुपयोग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, शीर्षक की स्वीकृति पर केवल केंद्रीय अधिकारी का नियंत्रण, छोटे और क्षेत्रीय प्रकाशनों के लिए समस्या बन सकता है। फिर भी, यह अधिनियम डिजिटल मीडिया को भी समाहित करते हुए एक व्यापक निगरानी ढांचा प्रदान करता है। इससे न केवल प्रेस क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि पाठकों को भी प्रमाणिक और उत्तरदायी सूचना प्राप्त होगी। कुल मिलाकर यह कानून मीडिया क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

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