सिक्किम उच्च न्यायालय ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए महिला कर्मचारियों को मासिक धर्म के दौरान विशेष अवकाश देने की व्यवस्था लागू की है। यह निर्णय भारत के किसी भी उच्च न्यायालय द्वारा पहली बार लिया गया है, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
जारी अधिसूचना के अनुसार, न्यायालय की रजिस्ट्री में कार्यरत महिला कर्मचारी प्रत्येक माह दो से तीन दिन तक मासिक धर्म अवकाश ले सकेंगी। यह अवकाश उनकी वार्षिक छुट्टियों की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए चिकित्सा अधिकारी की अनुशंसा आवश्यक होगी।

गौरतलब है कि सिक्किम उच्च न्यायालय, जो देश का सबसे छोटा उच्च न्यायालय है, वहां फिलहाल तीन न्यायाधीश और नौ रजिस्ट्री अधिकारी कार्यरत हैं, जिनमें से एक महिला अधिकारी हैं। इस नई नीति से न्यायालय ने न केवल एक संवेदनशील सामाजिक विषय को उठाया है, बल्कि अन्य संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
देशभर में अभी तक मासिक धर्म अवकाश को लेकर कोई केंद्रीकृत नीति या कानून लागू नहीं है। फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर दायर एक जनहित याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि यह सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी है और इसे विधायिका द्वारा तय किया जाना चाहिए।
सिक्किम उच्च न्यायालय की यह पहल कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए अनुकूल और सम्मानजनक वातावरण बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो आगे चलकर अन्य सरकारी और निजी संस्थानों को भी इसी राह पर चलने के लिए प्रेरित कर सकती है।