छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय: स्थापना, अधिकार क्षेत्र और ऐतिहासिक महत्व

न्यायिक प्रक्रिया

1 नवम्बर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, उसी दिन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) की भी स्थापना की गई। यह भारत के नवनिर्मित उच्च न्यायालयों में से एक है और देश का उन्नीसवां (19वां) उच्च न्यायालय माना जाता है। इस न्यायालय की स्थापना मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत की गई थी, जिससे इसे छत्तीसगढ़ राज्य के संपूर्ण क्षेत्राधिकार में न्यायिक अधिकार मिला।

उच्च न्यायालय का उद्घाटन 1 नवम्बर 2000 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बी.एन. कृपाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अरुण जेटली, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भवानी सिंह, तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.एस. गर्ग भी उपस्थित थे।

यह न्यायालय छत्तीसगढ़ की न्यायिक राजधानी बिलासपुर में स्थित है, जहाँ इसकी नवनिर्मित भव्य इमारत बोदरी क्षेत्र में बनाई गई है। वर्तमान में इस उच्च न्यायालय की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 22 है, जो राज्य के न्यायिक प्रशासन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए निर्धारित की गई है।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय न केवल राज्य में कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया का केंद्र है, बल्कि यह राज्य के संविधानिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है। अपनी स्थापना से अब तक इस न्यायालय ने कई ऐतिहासिक और जनहित के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बने।

यह न्यायालय छत्तीसगढ़ में न्याय की उपलब्धता को सुलभ बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ है, जिसने राज्य के नागरिकों को संविधान प्रदत्त न्याय प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम प्रदान किया है।

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