“यदि उपेक्षित रहा तो जलवायु संकट और विकराल रूप लेगा” — संयुक्त राष्ट्र महासचिव का मध्य एशिया सम्मेलन में चेतावनी संदेश
समरकंद, उज्बेकिस्तान — संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आज उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित “वैश्विक चुनौतियों के समक्ष मध्य एशिया: साझा समृद्धि हेतु एकता” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एक वीडियो संदेश के माध्यम से वैश्विक जलवायु संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जलवायु संकट को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संकट और भी भयानक रूप ले लेगा।
महासचिव ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव को सम्मेलन की मेज़बानी करने और 2025 को पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था का वर्ष घोषित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने क्षेत्र में संवाद और सहयोग की बढ़ती भावना की भी सराहना की, जो हाल ही में किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच हुई सीमा निर्धारण त्रिपक्षीय वार्ता में परिलक्षित हुई।
जलवायु संकट पर गंभीर चेतावनी देते हुए महासचिव ने कहा:
“हम दुनिया भर में जलवायु संकट के प्रभावों को स्पष्ट रूप से देख रहे हैं — अब तक के सबसे गर्म दिन, महीने, वर्ष और दशक रिकॉर्ड में दर्ज हो चुके हैं।”
उन्होंने कहा कि मध्य एशिया भी इससे अछूता नहीं है — यहाँ तेज़ गर्मी, हिमनदों का पिघलना, सूखा और धूल भरी आंधियाँ अब आम हो गई हैं। अगर यह स्थिति नहीं रुकी, तो इसका प्रभाव आर्थिक व्यवस्था, जनजीवन, आजीविका, खाद्य और जल आपूर्ति पर विनाशकारी होगा।
उन्होंने Aral Sea की त्रासदी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार पर्यावरणीय विनाश मानव और समुदायों को प्रभावित करता है, और यह स्पष्ट किया कि मध्य एशिया के देशों के बीच सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय प्रयासों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी कार्यवाही आवश्यक है।
महासचिव ने सभी देशों से अपील की कि वे वर्ष 2025 के लिए नई राष्ट्रीय जलवायु योजनाएँ (NDCs) बनाएं, जो वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य के अनुरूप हों, और जिनमें सभी उत्सर्जनों व पूरे आर्थिक क्षेत्र को शामिल किया गया हो। उन्होंने विशेष रूप से G20 देशों से नेतृत्व की अपेक्षा जताई।

महासचिव ने यह भी कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए यह एक अवसर है कि ऊर्जा संक्रमण, सतत विकास और जलवायु कार्यवाही को एक साथ जोड़कर निवेश आकर्षित किया जाए और समृद्धि व सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर उन्होंने बल देते हुए कहा:
- जलवायु वित्त के लिए नए 1.3 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य को सुनिश्चित किया जाना चाहिए;
- विकसित देशों को इस वर्ष से हर साल कम से कम 40 अरब डॉलर अनुकूलन (adaptation) के लिए देना चाहिए;
- और नुकसान व क्षति (loss and damage) के लिए कमजोर देशों और समुदायों को मजबूत सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
अंत में महासचिव ने सम्मेलन के आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“आप सभी का एकत्रित होना और समाधान की राह पर आगे बढ़ना प्रेरणादायक है। मैं आपके सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूँ।”