पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि बिहार में फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता बनी रहेगी। यह फैसला उन याचिकाओं के संदर्भ में आया है, जिनमें फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा निर्धारित मानकों को चुनौती दी गई थी।
कुछ याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह दलील दी थी कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित D.Pharm की अनिवार्यता अनुचित है और इससे छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन होता है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए PCI के दिशा-निर्देशों को वैध और आवश्यक माना।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को यह अधिकार है कि वह फार्मासिस्ट बनने के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करे। D.Pharm की अनिवार्यता न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है।

इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में फार्मासिस्ट बनने के लिए D.Pharm की डिग्री आवश्यक है। जो छात्र बिना इस योग्यता के फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण की अपेक्षा कर रहे थे, उन्हें अब D.Pharm की डिग्री प्राप्त करनी होगी।
पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय फार्मेसी शिक्षा में मानकों की स्थापना और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में फार्मेसी शिक्षा और पेशेवर मानकों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।