केरल मदरसा शिक्षक को 187 वर्षों की सजा: विशेष POCSO अदालत का ऐतिहासिक निर्णय

मामले एवं विश्लेषण

केरल के कन्नूर जिले में एक मदरसा शिक्षक को नाबालिग छात्रा के साथ बार-बार यौन शोषण के मामले में कुल 187 वर्षों की सजा सुनाई गई है। यह फैसला 9 अप्रैल 2025 को तलिपरंबा स्थित विशेष POCSO अदालत ने सुनाया, जो राज्य में बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में सबसे कठोर सजा में से एक माना जा रहा है।

दोषी का नाम मोहम्मद रफी है, जो कन्नूर के अलाकोडे क्षेत्र का निवासी है। उसके खिलाफ यह आरोप सिद्ध हुआ कि उसने कोविड-19 महामारी के दौरान, वर्ष 2020 से 2021 के बीच, 16 वर्षीय एक छात्रा का विश्वास जीतकर उसका बार-बार यौन शोषण किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने पास बुलाया और धार्मिक शिक्षा के नाम पर उसके साथ गलत हरकतें करता रहा।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला न सिर्फ एक बच्ची की गरिमा और सुरक्षा का उल्लंघन है, बल्कि समाज के प्रति एक गंभीर अपराध भी है। रफी को POCSO अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया और 187 वर्षों की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, उस पर 9 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

इस मामले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। स्थानीय समुदाय, सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए एक जाग्रति संकेत बताया है। धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों में बच्चों की निगरानी और संरक्षण पर कड़ी निगरानी की मांग जोर पकड़ रही है।

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