अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — ट्रंप को 1798 के कानून के तहत वेनेज़ुएलन प्रवासियों को निर्वासित करने की मिली आंशिक मंज़ूरी

मामले एवं विश्लेषण

अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अप्रवास पर कठोर रुख अपनाने की दिशा में राहत देते हुए 1798 के “एलिएन एनेमीज़ एक्ट” के तहत वेनेज़ुएलन नागरिकों को निष्कासित करने की अनुमति दी है। यह कानून अब तक केवल युद्धकाल में लागू होता आया है, लेकिन अब इसे आप्रवास नीति के तहत पहली बार सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।

5-4 के बहुमत से दिए गए निर्णय में, सुप्रीम कोर्ट ने वॉशिंगटन के जिला न्यायाधीश द्वारा लगाई गई अस्थायी रोक को निरस्त कर दिया, जिसने निर्वासन की प्रक्रिया को रोक रखा था। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे व्यक्तियों को उचित कानूनी प्रक्रिया और चुनौती देने का अधिकार मिलेगा, जिन्हें इस कानून के तहत निर्वासित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप, जिन्होंने चुनाव अभियान में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का वादा किया था, ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि अदालत ने देश की सीमाओं की रक्षा के संवैधानिक दायित्व को मान्यता दी है।

यह कानून 1798 में पारित किया गया था और इसे अब तक केवल 1812, प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही लागू किया गया था। पहली बार इसे शांति काल में सक्रिय रूप से प्रवासियों पर लागू किया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अधिनियम का उपयोग Tren de Aragua नामक कथित आपराधिक गिरोह से जुड़े वेनेज़ुएलन प्रवासियों को अमेरिका से बाहर भेजने के लिए किया है।

15 मार्च को बड़ी संख्या में वेनेज़ुएलन नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित कर एल साल्वाडोर की एक उच्च सुरक्षा वाली जेल में भेजा गया। इसके बाद एक जिला अदालत ने इस पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को तकनीकी कारणों, जैसे कि याचिकाकर्ताओं का टेक्सास में होना, के आधार पर हटाया।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा कि AEA के अंतर्गत निर्वासन का सामना कर रहे लोगों को उचित सूचना और अपील का अवसर मिलना चाहिए।

कई वकीलों का दावा है कि जिन लोगों को निर्वासित किया गया, वे अपराधी नहीं थे और केवल उनके शारीरिक टैटू के आधार पर उन्हें गिरोह से जोड़कर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने गिरोह के सदस्यों की हथकड़ी लगे और मुंडित सिर वाली तस्वीरों को मीडिया में जारी कर, इसे अपनी सख्ती का प्रमाण बताया।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी राहत जरूर है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि निष्कासन की प्रक्रिया में न्यायिक निगरानी और व्यक्ति के अधिकारों का ध्यान रखना जरूरी होगा। अब अगला सवाल यह है कि इन प्रवासियों की याचिकाओं की सुनवाई किस अदालत में होगी — यह आने वाले समय में तय किया जाएगा।

यह निर्णय न केवल अमेरिका की प्रवासन नीति पर प्रभाव डालेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि युद्धकालीन कानूनों का उपयोग शांति काल में किस हद तक न्यायसंगत है।

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