भारत में विधिक शिक्षा को पेशेवर, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम 1987 में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु की स्थापना के साथ शुरू हुआ। इसे “दूसरी पीढ़ी के विधिक शिक्षा सुधारों” का प्रारंभ माना गया। इसके बाद 1998 में NALSAR हैदराबाद की स्थापना हुई। धीरे-धीरे देश के विभिन्न राज्यों में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) अस्तित्व में आईं।
इन विश्वविद्यालयों को IITs और IIMs के मॉडल पर बनाया गया है और इनकी विशिष्टता यह है कि भारत विश्व का एकमात्र देश है जहां केवल विधि शिक्षा के लिए विशेष विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। अधिकांश NLUs में भारत के मुख्य न्यायाधीश या संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कुलाधिपति होते हैं। हालांकि, RMLNLU लखनऊ और डॉ. बी.आर. अंबेडकर NLU, राय (हरियाणा) में क्रमशः मुख्यमंत्री और राज्यपाल कुलाधिपति हैं।
शुरुआत में प्रत्येक NLU अपनी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था। इस असमानता को दूर करने के लिए 2006 में वरुण भगत बनाम भारत संघ केस में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें एक साझा प्रवेश परीक्षा की मांग की गई थी। इसके परिणामस्वरूप, 2008 में सात NLUs ने MHRD और UGC की उपस्थिति में एक साझा सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) की शुरुआत की। यह परीक्षा पहले ऑफलाइन और वस्तुनिष्ठ (MCQ) आधार पर ली जाती थी।
2015 में CLAT को ऑनलाइन किया गया और उसी वर्ष शम्नाद बशीर बनाम भारत संघ केस में एक और याचिका दायर कर स्थायी सचिवालय और संचालन निकाय की मांग की गई। इसके साथ ही 2018 में दिशा पंचाल द्वारा दाखिल एक अन्य याचिका के आधार पर CLAT के निष्पक्ष संचालन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
स्थायी CLAT सचिवालय की स्थापना 17 अक्टूबर 2018 को बेंगलुरु में की गई। फिर 2019 में, CLAT कर्नाटक कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत एक वैधानिक संस्था ‘कंसोर्टियम ऑफ NLUs’ बन गई, जिसमें प्रारंभ में 16 NLU संस्थापक सदस्य बने। NLSIU बेंगलुरु, NALSAR हैदराबाद और NLIU भोपाल इसके स्थायी सदस्य हैं।

अब CLAT परीक्षा का संचालन कंसोर्टियम की कार्यकारी परिषद (EC) करती है। हर वर्ष जनरल काउंसिल अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयोजक का चुनाव करती है। NLSIU बेंगलुरु के कुलपति कंसोर्टियम के स्थायी सचिव होते हैं।
CLAT कंसोर्टियम का उद्देश्य केवल स्नातक और स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा का संचालन नहीं, बल्कि सभी सदस्य विश्वविद्यालयों में उच्च गुणवत्ता की विधिक शिक्षा को बढ़ावा देना है।
CLAT और NLU प्रणाली ने भारत में विधिक शिक्षा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। यह न केवल प्रतिस्पर्धा को पारदर्शी और समान बनाया है, बल्कि छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त मंच भी प्रदान किया है।