गुवहाटी उच्च न्यायालय, जिसे पूर्व में असम उच्च न्यायालय के नाम से जाना जाता था, की स्थापना 5 अप्रैल 1948 को हुई थी। इसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एच. जे. कानिया द्वारा किया गया। सर आर. एफ. लॉज को असम उच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई थी।
इस न्यायालय की प्रारंभिक बैठकें शिलांग में आयोजित की जाती थीं, लेकिन 14 अगस्त 1948 को इसे गुवहाटी स्थानांतरित कर दिया गया। नागालैंड राज्य के गठन के पश्चात इसका नाम असम और नागालैंड उच्च न्यायालय कर दिया गया, किंतु वर्ष 1971 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के माध्यम से इसका नाम बदलकर गुवहाटी उच्च न्यायालय कर दिया गया।
गुवहाटी उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ असम के गुवाहाटी शहर में स्थित है। इसके अतिरिक्त इस न्यायालय की तीन शाखा पीठें हैं —
- कोहिमा पीठ (नागालैंड राज्य के लिए) – स्थापित: 1 दिसंबर 1972
- आइजोल पीठ (मिज़ोरम राज्य के लिए) – स्थापित: 5 जुलाई 1990
- ईटानगर पीठ (अरुणाचल प्रदेश राज्य के लिए) – स्थापित: 12 अगस्त 2000

23 मार्च 2013 तक गुवहाटी उच्च न्यायालय उत्तर-पूर्व भारत के सात राज्यों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय के रूप में कार्य करता था। इस तिथि से मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए अलग उच्च न्यायालयों की स्थापना हो गई।
वर्तमान में, गुवहाटी उच्च न्यायालय में कुल 24 स्वीकृत न्यायाधीशों के पद हैं, जिनमें माननीय मुख्य न्यायाधीश तथा 6 अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं। प्रत्येक न्यायाधीश, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी सम्मिलित हैं, भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।