कोलकाता, अप्रैल 2025:
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती से जुड़े बहुचर्चित घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए वर्ष 2016 के स्कूल सेवा आयोग (SSC) पैनल को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इस निर्णय से राज्य के लगभग 26,000 शिक्षकों और कर्मचारियों की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं, जो पिछले एक साल से न्याय की आस लगाए बैठे थे।
वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा के बाद से ही उस पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे थे। इसके चलते अनेक याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर की गईं। अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट ने नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
अब, एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। अदालत ने राज्य सरकार को तीन माह के भीतर नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले से प्रभावित शिक्षकों में निराशा और हताशा साफ दिखाई दे रही है। इनमें से अधिकांश ने अपनी आजीविका, भविष्य की योजनाएं और जीवन की स्थिरता इस नौकरी के भरोसे गढ़ी थी। कोलकाता की एक शिक्षिका अदिति बसु ने कहा, “हमने अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाया, लेकिन अब ऐसा महसूस होता है जैसे बिना गलती के सज़ा मिली हो।”

एक अन्य शिक्षक ने भावुक होते हुए कहा, “हम अपने बच्चों को संघर्ष और लगन का पाठ पढ़ाते रहे, और खुद ही अन्याय के शिकार हो गए।”
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस भर्ती प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ था और मूल दस्तावेज जैसे OMR शीट्स नष्ट हो चुके हैं, जिससे यह साबित करना संभव नहीं रह गया कि किस उम्मीदवार की नियुक्ति वैध थी और किसकी नहीं। हालांकि राहत की बात यह रही कि कोर्ट ने सभी उम्मीदवारों को वेतन वापसी के लिए बाध्य नहीं किया — केवल उन लोगों को राशि लौटानी होगी जिनकी उत्तर पुस्तिका में कुछ भी अंकित नहीं था।
फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार तीन महीने के भीतर नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करेगी। मगर विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी और शिक्षा व्यवस्था को गिरवी रखने जैसे आरोप लगाए हैं। राजधानी कोलकाता समेत कई जिलों में प्रभावित शिक्षक धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बंगाल की गिरती शिक्षा गुणवत्ता और भर्ती प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता है। एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा, “कभी बंगाल को शिक्षा का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब स्थिति चिंताजनक है।”
यह फैसला राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आगे की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और शीघ्र हो—यही अब राज्य की सबसे बड़ी चुनौती है।