दक्षिण कोरिया पिछले 17 सप्ताह से गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है, जिसने न केवल देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित किया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता उत्पन्न कर दी है। राष्ट्रपति यून सुक-योल के महाभियोग, प्रधानमंत्री हान डक-सू की अस्थायी बहाली और विपक्षी नेता ली जे-मयुंग पर चल रहे कई आपराधिक मामलों ने देश को राजनीतिक अस्थिरता की गिरफ्त में ले लिया है।
हाल ही में 24 मार्च को संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री को बहाल किया और 26 मार्च को सियोल की अदालत ने ली जे-मयुंग को चुनावी धोखाधड़ी के आरोपों से बरी कर दिया। लेकिन राष्ट्रपति यून के खिलाफ अंतिम निर्णय अब भी लंबित है, और जो भी फैसला आए, उससे राजनीतिक संकट खत्म नहीं होगा, बल्कि नया चरण शुरू होगा जिसमें विभाजन और बढ़ेगा।
इस लंबे संकट का सीधा असर उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंधों पर पड़ सकता है। जब दक्षिण कोरिया राजनीतिक रूप से अस्थिर होता है, तो उत्तर कोरिया अपनी रणनीति बदल सकता है और सीमा पर तनाव बढ़ा सकता है। यह स्थिति न केवल कोरियाई प्रायद्वीप के लिए बल्कि पूरा एशिया और विश्व व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
दुनिया पहले से ही यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, और चीन-ताइवान विवाद जैसे संकटों से जूझ रही है। ऐसे में यदि कोरियाई क्षेत्र में भी स्थिति विस्फोटक होती है, तो यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक नया मोर्चा खोल सकता है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के रिश्तों में आई खटास, ट्रंप प्रशासन द्वारा नए व्यापारिक शुल्क, और नेतृत्व की कमी से द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ा है।

सबसे गंभीर चिंता यह है कि इस राजनीतिक ठहराव के चलते दक्षिण कोरिया, अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ सामरिक मुद्दों पर संवाद नहीं कर पा रहा है। इसका फायदा उत्तर कोरिया को मिल सकता है, जो अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर सकता है।
इसलिए यह आवश्यक है कि दक्षिण कोरिया के राजनीतिक दल तत्काल समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्ष, त्वरित और निर्णायक भूमिका निभानी होगी। राष्ट्रपति के मामले में शीघ्र फैसला, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, और जनता का विश्वास बहाल करना समय की मांग है।यदि यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो केवल दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक नए भू-राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकती है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता बनाए रखना विश्व व्यवस्था और क्षेत्रीय शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है।