2025 INSC 125 Dr. Tanvi Behl v. Shrey Goel and Others
दिनांक: 29 जनवरी 2025 – न्यायालय का निर्णय
मुख्य मुद्दा:
क्या राज्य द्वारा निवास या डोमिसाइल आधारित आरक्षण पीजी मेडिकल कोर्स (MD/MS) में दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत वैध है?
PG मेडिकल कोर्स में प्रवेश NEET (National Eligibility cum Entrance Test) जैसी अखिल भारतीय परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। इस याचिका में यह प्रश्न उठाया गया कि क्या NEET मेरिट को दरकिनार कर राज्य कोई निवास आधारित आरक्षण निर्धारित कर सकता है। क्या PG स्तर की चिकित्सा शिक्षा में NEET आधारित समान अवसर का उल्लंघन करते हुए कोई राज्य डोमिसाइल के आधार पर आरक्षण दे सकता है?
न्यायालय का बहुमत निर्णय:
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी द्वारा दिया गया बहुमत निर्णय इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में NEET मेरिट से हटकर निवास या डोमिसाइल आधारित आरक्षण असंवैधानिक है और यह अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन करता है। न्यायालय ने माना कि NEET परीक्षा को दरकिनार कर स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देना समानता के अधिकार का अतिक्रमण है।
चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र के ‘गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ में 64 PG मेडिकल सीटें थीं, जिन्हें दो श्रेणियों में बाँटा गया था—
- इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस पूल (32 सीटें): वे छात्र जिन्होंने MBBS इसी कॉलेज से किया हो।
- UT चंडीगढ़ पूल (32 सीटें): वे छात्र जो चंडीगढ़ निवासी हों या जिनके माता-पिता चंडीगढ़ में रहते हों या जिनका किसी रूप में वहाँ से सम्बन्ध रहा हो।
इस व्यवस्था के कारण सभी 64 सीटों पर चंडीगढ़ से जुड़े छात्रों को वरीयता दी गई, जिससे NEET मेरिट पूरी तरह से अप्रासंगिक हो गई। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस आरक्षण को NEET परीक्षा की मूल भावना और अनुच्छेद 14 के विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया और आदेश दिया कि प्रवेश केवल NEET मेरिट के अनुसार हो।
सर्वोच्च न्यायालय में प्रश्न:
- क्या PG मेडिकल कोर्स में निवास आधारित आरक्षण असंवैधानिक है?
- यदि यह वैध है, तो इसका दायरा और तरीका क्या होगा?
- यदि यह अवैध है, तो ऐसी सीटों को कैसे भरा जाए?
बहुमत का उत्तर:
- प्रथम प्रश्न का उत्तर: हाँ, PG स्तर पर NEET मेरिट से हटकर निवास आधारित आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत असंवैधानिक है।
- चूंकि पहला उत्तर नकारात्मक है, इसलिए प्रश्न 2(a) और 2(b) अप्रासंगिक हो जाते हैं।
- प्रश्न 3 के अनुसार, केवल इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस को सीमित सीमा तक मान्य माना गया, बाकी सभी सीटें NEET की मेरिट लिस्ट के अनुसार भरी जानी चाहिए।
प्रमुख निर्णयों पर आधारित विचार:
न्यायालय ने इस संदर्भ में तीन ऐतिहासिक निर्णयों का गहन विश्लेषण किया:
- Jagadish Saran v. Union of India (1980) 2 SCC 768
- Dr. Pradeep Jain v. Union of India (1984) 3 SCC 654
- Saurabh Chaudri v. Union of India (2003) 11 SCC 146 (संविधान पीठ)
इन निर्णयों ने स्पष्ट किया कि PG स्तर पर NEET जैसे अखिल भारतीय मूल्यांकन को सर्वोपरि माना जाना चाहिए। निवास या डोमिसाइल आधारित आरक्षण NEET के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
संविधानिक प्रावधान:
अनुच्छेद 14: सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार।
अनुच्छेद 15(1): धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव निषिद्ध।
अनुच्छेद 16(2): निवास के आधार पर सरकारी सेवा में भेदभाव निषिद्ध।
(अनुच्छेद 16(3) संसद को कुछ अपवाद प्रदान करने का अधिकार देता है)
डोमिसाइल की परिभाषा पर न्यायालय का दृष्टिकोण:
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारत में केवल एक ही डोमिसाइल होता है – भारत का डोमिसाइल। राज्य स्तरीय डोमिसाइल की अवधारणा संविधान के विरुद्ध है। ‘स्थायी निवास’ या ‘डोमिसाइल’ शब्दों का उपयोग NEET मेरिट को हटाने के लिए किया गया, जो असंवैधानिक और अनुचित है। न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा डोमिसाइल शब्द के दुरुपयोग की आलोचना की।
PG मेडिकल कोर्स में NEET के माध्यम से प्राप्त मेरिट ही एकमात्र वैध और निष्पक्ष मानदंड है। निवास आधारित आरक्षण NEET प्रणाली के सिद्धांतों और अनुच्छेद 14 के उल्लंघन के कारण असंवैधानिक है।
केवल सीमित रूप में इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस स्वीकार्य है। जिन छात्रों को पूर्व में प्रवेश मिला था वे NEET मेरिट का उल्लंघन होने के बावजूद न्यायालय के अंतरिम आदेशों और इक्विटी सिद्धांतों के कारण प्रभावित नहीं होंगे।