बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा वकीलों और कानूनी प्रभावशाली व्यक्तियों के अनैतिक प्रचार की कड़ी निंदा

अधिवक्ता एवं बार काउंसिल

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने 17 मार्च 2025 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर, अधिवक्ताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लीगल इंफ्लुएंसर्स द्वारा किए जा रहे भ्रामक प्रचार और अनैतिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बीसीआई ने स्पष्ट किया कि भारत में अधिवक्ताओं को अपने पेशे का प्रचार करने की अनुमति नहीं है, और यह गतिविधि बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियमावली 2009 के नियम 36 का सीधा उल्लंघन है। परिषद ने कहा कि कानून का पेशा समाज सेवा और न्याय व्यवस्था की आधारशिला है, न कि व्यावसायिक गतिविधियों के समान कोई वस्तु जिसे प्रचारित या ब्रांड किया जाए।

विज्ञप्ति में यह बताया गया कि सोशल मीडिया, प्रमोशनल वीडियो और डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से वकील अपने कार्य को बढ़ावा दे रहे हैं, जो न केवल पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाता है बल्कि आम जनता को भ्रमित भी करता है। कुछ मामलों में तो बॉलीवुड कलाकारों और सेलिब्रिटी चेहरों का भी इस्तेमाल कानूनी सेवाओं के प्रचार हेतु किया गया है, जो पूरी तरह से अनुचित और अनैतिक है।

बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के कई निर्णयों का हवाला देते हुए बताया कि कानून की प्रैक्टिस एक सेवा है, न कि व्यापार। वर्ष 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पीएन विग्नेश बनाम बीसीआई के मामले में दिए गए निर्णय के आधार पर परिषद ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिए थे कि वे ऐसे वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करें जो ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे क्विकर, जस्ट डायल, सुलेखा आदि पर अपने नाम और सेवाएं प्रचारित कर रहे हैं।

परिषद ने यह भी देखा कि कुछ अधिवक्ता धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों में बैनर, स्टॉल और डिजिटल बोर्ड के माध्यम से भी प्रचार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, कई स्वयंभू लीगल इंफ्लुएंसर्स बिना वैध पंजीकरण के महत्वपूर्ण कानूनी विषयों जैसे विवाह विवाद, गोपनीयता अधिकार, नागरिकता कानून और कर नियमों पर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं।

इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए बीसीआई ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सभी अनैतिक प्रचार, सेलिब्रिटी समर्थन, भ्रामक डिजिटल सामग्री, और गैर-पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा दी जा रही कानूनी सलाह को तत्काल बंद करने को कहा गया है। इन निर्देशों की अवहेलना पर वकीलों का नामांकन निलंबित या रद्द किया जा सकता है। परिषद ने सभी अधिवक्ताओं और प्लेटफार्मों से सहयोग की अपील की है ताकि विधिक सेवा की गरिमा बनी रहे।

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