भारत सरकार ने 5 अप्रैल 2025 को “मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) अधिनियम, 2025” को अधिसूचित किया, जिसके तहत 1923 के मुसलमान वक़्फ़ अधिनियम को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया गया। यह अधिनियम संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद लागू हुआ।
मुख्य बिंदु:
- अधिनियम का उद्देश्य: 1923 के मुसलमान वक़्फ़ अधिनियम को निरस्त करना।
- लागू होने की तिथि: 5 अप्रैल 2025 से प्रभावी।
- प्रभाव: इस अधिनियम के तहत, 1923 के अधिनियम के तहत किए गए सभी कार्य, दायित्व, या कानूनी कार्यवाहियाँ यथावत रहेंगी, जब तक कि उन्हें नए कानूनों के तहत विशेष रूप से निरस्त या संशोधित न किया जाए।
1923 का मुसलमान वक़्फ़ अधिनियम वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके खातों के रख-रखाव के लिए बनाया गया था। हालांकि, 1995 में वक़्फ़ अधिनियम के लागू होने के बाद, 1923 का अधिनियम अप्रासंगिक हो गया था। इसलिए, इसे औपचारिक रूप से निरस्त करना आवश्यक हो गया था।

इस अधिनियम के निरसन के साथ ही, वक़्फ़ से संबंधित सभी मामलों का प्रबंधन 1995 के वक़्फ़ अधिनियम और उसके संशोधनों के तहत किया जाएगा। हाल ही में, वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है, जिसमें वक़्फ़ बोर्डों की संरचना, प्रबंधन और पारदर्शिता से संबंधित कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
“मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) अधिनियम, 2025” एक महत्वपूर्ण विधिक कदम है, जो भारत में वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है। यह अधिनियम पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाकर एक समेकित और अद्यतन विधिक ढांचे की स्थापना करता है।