मामला और संदर्भ
Sanjay Kumar Agarwal बनाम State Tax Officer, (2024) 2 SCC 362
उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्न
क्या कोई निर्णय केवल इसलिए पुनर्विचार हेतु खोला जा सकता है क्योंकि याचिकाकर्ता उससे असहमत है? आदेश 47 नियम 1 सीपीसी के तहत पुनर्विचार किन सीमाओं और आधारों पर किया जा सकता है?
न्यायालय का निर्णय और विधिक सिद्धांतों का सारांश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश 47 नियम 1 सीपीसी के अंतर्गत पुनर्विचार याचिका की सीमाओं और स्वीकार्य आधारों को स्पष्ट रूप से संक्षेप में प्रस्तुत किया:
- यदि कोई त्रुटि स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड पर उपलब्ध हो, और मात्र देखने से ही सामने आ जाए, तो ही पुनर्विचार संभव है।
- कोई भी निर्णय अंतिम होता है, और केवल अत्यंत गंभीर और विवशकारी परिस्थितियों में ही उससे हटने का औचित्य बनता है।
- ऐसी त्रुटि जिसे तर्कपूर्ण विश्लेषण से खोजा जाए, वह “record पर स्पष्ट त्रुटि” नहीं मानी जाती और पुनर्विचार का आधार नहीं हो सकती।
- आदेश 47 नियम 1 सीपीसी के अंतर्गत अधिकार का प्रयोग करते हुए, पहले से ही सुने और निपटाए गए मामले को पुनः सुनना और सुधारना अनुमेय नहीं है।
- पुनर्विचार का उद्देश्य सीमित है — यह छिपी हुई अपील (appeal in disguise) का रूप नहीं ले सकता।
- पुनर्विचार के नाम पर पुनः विवाद उठाना या उन्हीं बिंदुओं पर पुनः तर्क करना, जो पहले ही निर्णय का विषय बन चुके हों, अनुमेय नहीं है।
- स्पष्ट त्रुटि का अर्थ ऐसी त्रुटि है जो केवल रिकॉर्ड देखने से ही तुरंत ध्यान में आ जाए — न कि ऐसे विषय जिन पर मतभेद संभव हो या तर्क की आवश्यकता हो।
- केवल कानून में परिवर्तन या समकोटि या बड़ी पीठ के निर्णय का आना, अपने आप में पुनर्विचार का आधार नहीं बन सकता।
प्रासंगिक विधिक प्रावधान
- Order 47 Rule 1, CPC – स्पष्ट त्रुटि, नई जानकारी या पर्याप्त कारण होने पर ही पुनर्विचार की अनुमति।
- सिद्धांत: पुनर्विचार का उद्देश्य न्याय की त्रुटियों को सुधारना है, न कि निर्णय की दोबारा समीक्षा करना।
न्यायसम्मत निष्कर्ष
Sanjay Kumar Agarwal v. State Tax Officer में सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहराया कि पुनर्विचार याचिका का प्रयोग केवल सीमित और न्यायसंगत आधारों पर ही किया जा सकता है। पुनर्विचार का माध्यम उन त्रुटियों को सुधारने के लिए है जो स्पष्ट, अभिलिखित और गंभीर हों — न कि अपील की तरह पूरे मामले की पुनः बहस के लिए। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की अंतिमता और स्थायित्व को बनाए रखने की दिशा में एक स्पष्ट मार्गदर्शन है।