बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा कदम: कानून छात्रों के लिए क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और CCTV अनिवार्य
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सभी कानून शिक्षण संस्थानों (Centers of Legal Education – CLEs) के लिए एक सख्त अधिसूचना जारी की है, जिसके अंतर्गत कानून के छात्रों को अब आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, समानांतर डिग्री या रोजगार की घोषणा, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और कक्षा में CCTV कैमरों की स्थापना जैसी शर्तों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।
इस अधिसूचना का संदर्भ LE Circular No. 13/2024 है (BCI:D:5186/2024) और यह सभी विश्वविद्यालयों, लॉ कॉलेजों और छात्रों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
मुख्य निर्देश
आपराधिक पृष्ठभूमि की घोषणा (Criminal Background Check):
हर कानून छात्र को अपने खिलाफ दर्ज किसी भी FIR, मामला, दोषसिद्धि या बरी होने की जानकारी देनी होगी। जानकारी छुपाने पर मार्कशीट व डिग्री रोक दी जाएगी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। संबंधित CLE को यह रिपोर्ट BCI को भेजनी होगी और अंतिम निर्णय तक मार्कशीट रोकनी होगी।
समानांतर डिग्री या नियमित शिक्षा कार्यक्रम की घोषणा:
BCI नियम 2008 के तहत, कोई छात्र एक साथ दो नियमित पाठ्यक्रम नहीं कर सकता। केवल मान्य शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स या डिस्टेंस लर्निंग की अनुमति है। नियम का उल्लंघन करने वाले छात्रों को डिग्री नहीं दी जाएगी।
रोज़गार स्थिति व उपस्थिति अनुपालन:
यदि कोई छात्र एलएलबी के दौरान सेवा या रोजगार में था, तो उसे वैध No Objection Certificate (NOC) प्रस्तुत करनी होगी। नियम 12 के अनुसार उपस्थिति की न्यूनतम आवश्यकता पूरी होनी चाहिए। जानकारी छुपाने पर छात्र व CLE दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस व CCTV निगरानी:
हर CLE में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली व कक्षा में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। रिकॉर्डिंग को एक वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा।
गंभीर गैर-अनुपालन पर सख्त कार्रवाई:
BCI ने चेताया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है। छात्रों की डिग्री व मार्कशीट भी रोकी जा सकती हैं और कानूनी कार्रवाई संभव है।

छात्रों को देना होगा लिखित शपथ-पत्र:
प्रत्येक छात्र को अपनी पृष्ठभूमि, शिक्षा की स्थिति, रोजगार व उपस्थिति से संबंधित घोषणा वाला अंडरटेकिंग (undertaking) जमा करना अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें डिग्री और मार्कशीट जारी नहीं की जाएगी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया का यह कदम भारतीय विधि शिक्षा में नैतिकता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इससे न केवल प्रोफेशन में अनुशासन आएगा बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि केवल चरित्रवान और योग्य विद्यार्थी ही वकालत के पेशे में प्रवेश करें।