मानसिक स्वास्थ्य पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: छात्र आत्महत्या मामलों पर टास्क फोर्स ने शुरू किया कार्य
नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2025 – भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने देश के शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते छात्र आत्महत्या के मामलों को लेकर गंभीर पहल की है। यह टास्क फोर्स छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का गहन मूल्यांकन करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
टास्क फोर्स की पृष्ठभूमि और संरचना
उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च 2025 में इस टास्क फोर्स का गठन किया। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट कर रहे हैं। इसके सदस्यों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
इस समिति में मनोचिकित्सक डॉ. आलोक सरिन, समाजशास्त्री प्रो. मैरी ई. जॉन, विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता अरमान अली, उच्च शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. सीमा मेहता, और अन्य विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। साथ ही, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी भी इसके आधिकारिक सदस्य होंगे।
प्राथमिकता और कार्ययोजना
29 मार्च 2025 को आयोजित अपनी पहली बैठक में, टास्क फोर्स ने आत्महत्या की जड़ में मौजूद सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक कारकों को समझने की दिशा में कार्य योजना तैयार की। समिति को चार महीनों में अंतरिम रिपोर्ट और आठ महीनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।
समिति विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों, छात्रों, अभिभावकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से संवाद कर सार्थक सुझाव और अनुभव जुटाएगी। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा, ताकि आम नागरिक अपनी राय और अनुभव साझा कर सकें।

सामाजिक और कानूनी महत्व
यह पहल भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चल रही चर्चाओं को एक संस्थागत और कानूनी आधार देती है। सुप्रीम कोर्ट की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि अब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छात्र का संपूर्ण मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।