मुंबई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि सुविधा स्टोर को चौबीसों घंटे यानी चौबीस गुणा सात आधार पर संचालित करने पर किसी प्रकार की कानूनी रोक नहीं है।
इस फैसले में न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम सेठना की खंडपीठ ने कहा कि आज के समय में चौबीसों घंटे खुली रहने वाली दुकानों की अवधारणा पूरी दुनिया में प्रचलित है। ऐसी दुकानें विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी होती हैं जिनका कार्य समय नियमित नहीं होता। साथ ही यह मॉडल देश की अर्थव्यवस्था को गति देता है और रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि इस तरह की दुकानों से उपभोक्ताओं को सुविधा मिलती है और यह व्यापार क्षेत्र में लचीलापन प्रदान करता है। इसके सकारात्मक आर्थिक प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने इन पर समय से संबंधित कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।
पुणे की द न्यू शॉप को चौबीसों घंटे खोलने की अनुमति
यह निर्णय पुणे की एक सुविधा स्टोर द न्यू शॉप के पक्ष में दिया गया है। यह दुकान एक्सीलरेट प्रोडक्ट्स वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित की जा रही है और इसका संचालन महाराष्ट्र दुकानदार एवं प्रतिष्ठान अधिनियम दो हजार सत्रह के अंतर्गत किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि दुकान ने सभी आवश्यक पंजीकरण और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की हैं, फिर भी हड़पसर पुलिस स्टेशन ने दुकान को रात दस से ग्यारह बजे के बीच बंद करने का आदेश दिया। जबकि इस प्रकार का कोई नियम अधिनियम में नहीं है।
पुलिस की गलती और अदालत की टिप्पणी
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी और सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त उत्तर में यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे सुविधा स्टोर को चौबीसों घंटे संचालन के लिए पुलिस की कोई विशेष अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि पुलिस ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने गलती से रेस्तरां और मदिरा परोसने वाले प्रतिष्ठानों के नियम इस स्टोर पर लागू कर दिए थे क्योंकि वहां खाद्य सामग्री भी बेची जा रही थी।
न्यायालय ने कहा कि सुविधा स्टोर को होटल या बार के नियमों में शामिल नहीं किया जा सकता। कानून की गलत व्याख्या करके दुकान पर प्रतिबंध लगाना अनुचित और अवैध है। अदालत ने इस आधार पर स्पष्ट कर दिया कि ऐसे स्टोर को समय की सीमा में बांधना गलत है।
निष्कर्ष
अदालत ने अपने आदेश में यह कहा कि सुविधा स्टोर यदि सभी कानूनी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं तो उनके संचालन पर कोई मनमाना समय संबंधी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।