लोकसभा में आज तटीय नौवहन विधेयक, 2024 प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य भारत के तटीय जलक्षेत्रों में व्यापार में संलग्न सभी प्रकार के जहाजों और पोतों को नियामित करना है। यह विधेयक मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 1958 के भाग XIV को रद्द करने का प्रस्ताव करता है, जिससे अब सभी प्रकार के जलयान, चाहे वे स्वचालित हों या न हों, इस कानून के दायरे में आएंगे।
मुख्य प्रावधान:
– सेवाओं को भी तटीय व्यापार में शामिल किया गया: अब माल और यात्रियों के साथ-साथ सेवाएं जैसे अनुसंधान, अन्वेषण और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियाँ (मछली पकड़ने को छोड़कर) भी तटीय व्यापार की परिभाषा में शामिल होंगी।
– भारतीय स्वामित्व वाले पोतों को लाइसेंस की आवश्यकता नहीं: पूरी तरह से भारतीय व्यक्तियों के स्वामित्व वाले पोतों को तटीय व्यापार के लिए अब लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
– विदेशी स्वामित्व वाले या किराए पर लिए गए पोतों के लिए लाइसेंस अनिवार्य: यदि कोई पोत भारतीय या अनिवासी भारतीय (NRI) या ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) द्वारा किराए पर लिया गया है, तो उन्हें विशिष्ट स्थितियों में लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
– जुर्माने में वृद्धि: अब बिना लाइसेंस के संचालन पर अधिकतम ₹15 लाख या अवैध लाभ का चार गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
– नए प्रावधानों के अंतर्गत पोतों को हिरासत में लिया जा सकेगा: यदि किसी पोत का संचालन बिना लाइसेंस के होता है, या गलत जानकारी दी जाती है, तो पोत को जब्त किया जा सकता है।
– राष्ट्रीय तटीय एवं अंतर्देशीय नौवहन रणनीतिक योजना: विधेयक के अनुसार, केंद्र सरकार को दो वर्षों के भीतर एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करनी होगी।
– केवल सीमित अपराध ही अब समझौता योग्य होंगे: अब केवल कुछ ही मामलों को समझौते के तहत सुलझाया जा सकेगा, जैसे कि बिना लाइसेंस के संचालन, जानकारी न देना, आदि।
तटीय नौवहन विधेयक, 2024 भारत की समुद्री व्यापार नीतियों में समग्र सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल व्यापार प्रक्रिया को सरल बनाएगा बल्कि विदेशी निवेश और व्यापार को भी अधिक पारदर्शिता और अनुशासन के साथ बढ़ावा देगा।