अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लागू किए गए भारी-भरकम टैरिफों के कारण वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। दुनिया की शीर्ष कंपनियों से करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की बाजार पूंजी एक ही दिन में मिट गई, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका गहरा गई है।
बाजारों में सबसे बड़ी गिरावट: अमेरिकी शेयर बाजारों में जून 2020 के बाद सबसे बुरा दिन रहा। नैस्डैक 5.97%, S&P 500 4.8% और डाउ 3.9% गिर गए। टेक कंपनियों को सबसे ज्यादा झटका लगा, जिसमें केवल Apple और Nvidia ने ही मिलकर $470 अरब का घाटा दर्ज किया।
टैरिफ नीति का असर: ट्रम्प ने 10% से 50% तक के टैरिफ सभी व्यापारिक साझेदारों पर लागू किए हैं। इससे चीन, वियतनाम, यूरोपीय संघ और यहां तक कि अमेरिका के पारंपरिक मित्र कनाडा और ब्रिटेन भी प्रभावित हुए हैं। ब्रिटेन ने प्रतिशोध के संकेत देते हुए अमेरिकी उत्पादों की 417 वस्तुओं की सूची जारी की है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर गहरा असर: कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम जैसे गरीब देशों पर भारी टैरिफ लगाया गया है – जिनमें कंबोडिया पर 49% और म्यांमार पर 44%। इससे स्पोर्ट्स और परिधान उद्योग पर खास असर पड़ा है। Nike, Adidas और Puma जैसी कंपनियों के शेयर गिर गए हैं।
डॉलर में गिरावट: अमेरिकी डॉलर छह महीने के निचले स्तर पर पहुँच गया, जिससे दुनिया की ‘सुरक्षित’ मुद्रा की छवि को झटका लगा है। डॉयचे बैंक ने इसे “डॉलर आत्मविश्वास संकट” करार दिया।
आलोचना और समर्थन: दुनिया भर के नेताओं ने ट्रम्प की नीति की आलोचना की। फ्रांस, जर्मनी और स्पेन ने इसे “अनुचित और एकतरफा” बताया। अमेरिका के भीतर भी, सीनेटर मिच मैककोनेल ने इसे “खराब नीति” कहा। इसके बावजूद ट्रम्प ने कहा, “यह ऑपरेशन जैसा है – दर्दनाक लेकिन फायदेमंद।”
विश्लेषकों की चेतावनी: टैक्स फाउंडेशन के अनुसार, यह नीति $1.8 ट्रिलियन का कर भार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर डालेगी। वहीं, ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक विकास दर 2008 के आर्थिक संकट के स्तर तक गिर सकती है।
