“अनुसंधान को रणनीतिक दिशा देने वाला नया युग: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान अधिनियम, 2023 की भूमिका और प्रभाव”

विधि विशेष

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान अधिनियम, 2023 (Anusandhan National Research Foundation Act, 2023) भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा देने के उद्देश्य से पारित किया गया एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी अधिनियम है। यह अधिनियम प्राकृतिक विज्ञानों, गणितीय विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य, कृषि तथा मानविकी और सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी-आधारित पहलुओं में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, उसका मूल्यांकन करने और आवश्यकतानुसार सहायता प्रदान करने हेतु लागू किया गया है।

धारा 3 से 5 तक के प्रावधानों के अंतर्गत इस अधिनियम के तहत “अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान” (Anusandhan NRF) की स्थापना की गई है, जो एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करेगा। इसके अधीन गवर्निंग बोर्ड और कार्यकारी परिषद जैसी संरचनाओं की व्यवस्था की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री अध्यक्ष और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री तथा शिक्षा मंत्री उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। यह संरचना देश के नीति निर्धारण में वैज्ञानिक शोध को समाविष्ट करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है।

धारा 4 में अधिनियम के उद्देश्य स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं, जैसे कि दीर्घकालिक अनुसंधान योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान की क्षमता को बढ़ावा देना, उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना, नवाचारों को पूंजी आधारित तकनीकों में बदलने में सहायता करना, और निजी क्षेत्र को अनुसंधान में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।

इसके अतिरिक्त अधिनियम में धारा 13 और 14 के अंतर्गत वित्तीय प्रावधानों की भी विस्तृत व्यवस्था की गई है, जिसमें “अनुसंधान फंड”, “इनोवेशन फंड”, और “विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान फंड” जैसे कोषों की स्थापना की गई है, ताकि अनुसंधान गतिविधियों को सतत वित्तीय सहयोग मिल सके।

यह अधिनियम विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक है, जो शोध और नवाचार को उच्च शिक्षा संस्थानों के केंद्र में लाने पर बल देती है। साथ ही यह अधिनियम Science and Engineering Research Board Act, 2008 को निरस्त कर एक अधिक समेकित और एकीकृत ढांचे की ओर संकेत करता है।

प्रासंगिकता के बिंदु:

  • यह अधिनियम अनुसंधान को नीतिगत प्राथमिकताओं से जोड़ता है, जिससे देश की वैज्ञानिक प्रगति और आर्थिक विकास में योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
  • नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य करता है।
  • वित्तीय पारदर्शिता और मूल्यांकन को संस्थागत स्वरूप में समाहित करता है जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके।

इस प्रकार, Anusandhan National Research Foundation Act, 2023 एक ऐसा विधिक और नीतिगत उपकरण है जो भारत को अनुसंधान और नवाचार की दिशा में वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की क्षमता रखता है। यह अधिनियम केवल एक संगठनात्मक परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की नींव है।

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