नीदरलैंड के 10 शहरों में वैध गांजा बिक्री की शुरुआत: संगठित अपराध पर लगाम और स्वास्थ्य सुरक्षा पर परीक्षण

भारतीय कानून

7 अप्रैल 2025 से नीदरलैंड के 10 नगरपालिकाओं में वैध रूप से उगाए गए गांजे की बिक्री की शुरुआत की गई है। इस लंबे परीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इन नगरों के करीब 80 कैनबिस कैफे या कॉफी शॉप्स अब केवल लाइसेंस प्राप्त उत्पादकों से आपूर्ति प्राप्त गांजा ही बेचेंगे। यह प्रयोग 2029 तक चलेगा।

इस योजना में शामिल शहर हैं: आर्नहेम, आलमेरे, ब्रेडा, ग्रोनिंगन, हीरलन, मास्ट्रिख्ट, नाइमेखेन, टिलबर्ग, वॉर्ने आन ज़े और ज़ानस्टाड। इस पहल का उद्देश्य यह आकलन करना है कि गांजा उत्पादन को लाइसेंस देने से संगठित अपराध पर क्या प्रभाव पड़ता है और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य में कोई सुधार होता है या नहीं।

हालांकि, फिलहाल हशीश (hashish) को वैध सूची में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उसकी आपूर्ति को लेकर कुछ अनिश्चितताएं हैं। डच न्याय मंत्री डेविड वैन वील ने पिछले सप्ताह सांसदों को बताया कि 10 जून से हशीश भी शामिल किया जा सकता है, यदि आपूर्ति व्यवस्था स्थिर हो जाती है।

पिछले वर्ष तक ये कॉफी शॉप्स वैध और अवैध दोनों प्रकार के गांजे की बिक्री करते रहे हैं। अब से सरकारी निरीक्षक इन दुकानों की निगरानी करेंगे कि केवल लाइसेंस प्राप्त गांजा ही बेचा जाए। टिलबर्ग के एक कॉफी शॉप मालिक विलेम वुग्स ने बताया कि गुणवत्ता और विविधता सुनिश्चित करने के लिए हशीश के उत्पादन में अधिक समय देना सही कदम है।

इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य नीदरलैंड की वर्तमान “गेडोगेन नीति” को समाप्त करना है, जिसमें गांजे की थोड़ी मात्रा रखने और बिक्री की अनुमति तो है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और आपूर्ति अब भी अवैध है। इसे ही “फ्रंट डोर-बैक डोर सिस्टम” कहा जाता है—जहां दुकानों के सामने से कानूनी रूप से बिक्री होती है, लेकिन पीछे से आपूर्ति अवैध होती है।

ब्रेडा के मेयर पॉल डेलपा, जो इस विनियमित प्रणाली के मुखर समर्थक रहे हैं, ने पिछले साल कहा था कि यह प्रयोग सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया, “लोग दुकानों से वैध रूप से गांजा खरीद सकते हैं, लेकिन उसका उत्पादन और आपूर्ति अवैध होती है। इससे एक संगठित आपराधिक तंत्र फलता-फूलता है, जिसे रोकना आवश्यक है।”

इस प्रयोग के ज़रिए डच सरकार अब उस ‘पीछे के दरवाज़े’ को बंद करने का प्रयास कर रही है, जिससे न केवल अपराध पर नियंत्रण पाया जा सके, बल्कि स्वास्थ्य और उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर भी एक मानक स्थापित किया जा सके।

यदि यह योजना सफल रही, तो यह वैश्विक स्तर पर नशा नियंत्रण और वैधिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मॉडल साबित हो सकती है।

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