जापान में विधि-संबंधी शिक्षा: नागरिक जागरूकता की ओर एक निर्णायक कदम “Power to Live!” विधि-संबंधी शिक्षा का उद्देश्य

करियर व शिक्षा

जापान में विधि-संबंधी शिक्षा (Law-Related Education) का उद्देश्य उन नागरिकों को कानून, न्याय प्रणाली और उनसे जुड़े मूल्यों की समझ देना है जो विधिक पेशेवर नहीं हैं। यह शिक्षा आम नागरिकों को लोकतांत्रिक समाज में सशक्त और जागरूक भूमिका निभाने में समर्थ बनाती है।

2016 में मतदान आयु घटाए जाने और अप्रैल 2022 से वयस्कता की न्यूनतम आयु कम किए जाने के बाद विधि-संबंधी शिक्षा की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

विधि-संबंधी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास

न्याय मंत्रालय ने मई 2005 में Law-Related Education Promotion Council की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य है—सामान्य नागरिकों को Lay Judge System जैसी न्यायिक सुधारों के प्रभाव को समझाना और शिक्षा के माध्यम से विधिक मूल्यों का प्रसार करना। इस परिषद् द्वारा विभिन्न दृष्टिकोणों से यह अध्ययन किया जा रहा है कि विधि-संबंधी शिक्षा को कैसे अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

शैक्षिक सामग्री और कक्षाओं की व्यवस्था

विधि-संबंधी शिक्षा को सरल और व्यावहारिक बनाने हेतु प्राथमिक, जूनियर हाई और हाई स्कूल छात्रों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक सामग्री तैयार की गई है। यह सामग्री केवल कक्षाओं में ही नहीं, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षण और कार्यशालाओं में भी उपयोग की जा सकती है।

विद्यालयों में कक्षाएं आयोजित करने हेतु प्रशिक्षकों की तैनाती

स्कूलों से अनुरोध प्राप्त होने पर न्याय मंत्रालय के अधिकारी प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक जाकर कक्षाएं आयोजित करते हैं, जिससे बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही कानूनी जागरूकता प्राप्त हो सके।

विधि-संबंधी शिक्षा का शुभंकर: Hourisu-kun

विधि-संबंधी शिक्षा को लोकप्रिय और सुलभ बनाने हेतु Hourisu-kun नामक एक शुभंकर चुना गया है। यह नाम जापानी शब्दों houritsu (कानून) और risu (गिलहरी) को मिलाकर बनाया गया है। Hourisu-kun विधिक शैक्षणिक सामग्री में सक्रिय भूमिका निभाता है और बच्चों को आकर्षक तरीकों से कानून की जानकारी देने में सहायक है।

जापान की यह पहल केवल विधिक प्रणाली को समझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त नागरिक समाज के निर्माण की नींव है। Power to Live! जैसे कार्यक्रम, नई पीढ़ी को कानून के प्रति न केवल सजग बनाते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और भागीदारी नागरिक भी बनाते हैं।

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