गुजरात उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति से पहले एक से अधिक विवाह करता है, तो उसकी मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन दोनों विधवाओं के बीच समान रूप से वितरित की जानी चाहिए।
यह मामला एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी दो विधवाओं के बीच पेंशन के अधिकार को लेकर उत्पन्न विवाद से संबंधित है। याचिकाकर्ता, जो पहली पत्नी थीं, ने अदालत में याचिका दायर कर पेंशन में अपना हिस्सा मांगा, क्योंकि पूरी पेंशन दूसरी पत्नी को दी जा रही थी।
गुजरात सिविल सेवा पेंशन नियम, 2002 का हवाला देते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि जब एक से अधिक विधवाएं हों, तो पेंशन को उनके बीच समान रूप से विभाजित किया जाना चाहिए। नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहली या दूसरी पत्नी में से किसे पेंशन का अधिकार है, बल्कि यह कहा गया है कि दोनों विधवाओं को समान रूप से पेंशन का भुगतान किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पेंशन के लिए नामांकन फॉर्म में किसी एक पत्नी का नाम होने के बावजूद, यदि दोनों पत्नियां कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से पहले विवाह में थीं, तो दोनों को पेंशन का समान अधिकार है।

उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरण को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को तीन महीने के भीतर उसके पति की पारिवारिक पेंशन का आधा हिस्सा प्रदान किया जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक दूसरी पत्नी को दी गई पेंशन राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
यह निर्णय पारिवारिक पेंशन के मामलों में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में ऐसे विवादों के समाधान में मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करेगा।