भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण – लक्ष्य और वर्गीकरण निर्देश, 2025 जारी किए हैं, जो सितंबर 2020 में जारी निर्देशों का स्थान लेंगे। इन नए निर्देशों का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में पर्याप्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना है। प्रमुख बदलावों में शहरी सहकारी बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का लक्ष्य अब 2025-26 तक 75 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत तय किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऋण सीमा 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 35 करोड़ रुपये कर दी गई है। कमजोर वर्गों के लिए, कारीगरों तथा ग्रामीण/कुटीर उद्योगों के लिए ऋण सीमा एक लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है, जबकि महिला लाभार्थियों के लिए भी प्रति उधारकर्ता सीमा दो लाख रुपये तक कर दी गई है (शहरी सहकारी बैंकों पर लागू नहीं)। इसके अतिरिक्त, ट्रांसजेंडर और संयुक्त दायित्व समूहों को भी कमजोर वर्ग की परिभाषा में शामिल किया गया है।