राजेन्द्र दीवान बनाम प्रदीप कुमार रानीबाला एवं अन्य
[सिविल अपील संख्या 3613/2016, निर्णय दिनांक 10 दिसंबर 2019]
मुख्य विवाद/प्रमुख मुद्दा:
क्या छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम, 2011 की धारा 13(2), जो छत्तीसगढ़ रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान करती है, संविधान के अंतर्गत वैध है या नहीं?
याचिकाकर्ता की दलीलें:
राज्य सरकार को भूमि संबंधी कानून बनाने का अधिकार है (अनुच्छेद 246 एवं राज्य सूची की प्रविष्टि 18)।
धारा 13(2) केवल सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा अपील अधिकारिता (धारा 136) का विस्तार है।
राष्ट्रपति की सहमति (अनुच्छेद 200) मिल चुकी है, इसलिए यह वैध है।
अनुच्छेद 138(2) में विशेष समझौते द्वारा सुप्रीम कोर्ट की अधिकारिता का विस्तार संभव है।
अटॉर्नी जनरल की दलीलें:
राज्य विधानमंडल को सुप्रीम कोर्ट की अधिकारिता को प्रभावित करने वाला कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं (राज्य सूची की प्रविष्टि 65 और समवर्ती सूची की प्रविष्टि 46)।
धारा 13(2) सुप्रीम कोर्ट के लिए एक वैधानिक अपील अधिकार स्थापित करती है, जो कि संविधान के अनुसार केवल संसद द्वारा किया जा सकता है।
राष्ट्रपति की सहमति विधायी अधिकार नहीं दे सकती यदि विधानमंडल की मूलतः विधायी शक्ति ही नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय का बहुमत निर्णय:
छत्तीसगढ़ राज्य विधानमंडल को सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अधिकारिता निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है।
धारा 13(2) संविधान के विरुद्ध है, अतः शून्य (null and void) घोषित की जाती है।
राष्ट्रपति की सहमति (Article 200/201) विधायी अतिक्रमण को वैध नहीं बना सकती।
अनुच्छेद 138(2) के अंतर्गत “विशेष समझौता” केवल केंद्र और राज्य सरकार के बीच स्वतंत्र समझौते द्वारा ही हो सकता है, न कि राष्ट्रपति की सहमति मात्र से।
सुप्रीम कोर्ट की अपील अधिकारिता केवल संसद द्वारा ही बढ़ाई जा सकती है (Entry 77, Union List)।