पंजीकरण अधिनियम की धारा 47: विक्रय विलेख की प्रभावी तिथि निष्पादन की तिथि मानी जाएगी, न कि पंजीकरण की तिथि

विधिक समाचार

मामला और संदर्भ
Kanwar Raj Singh (मृतक) द्वारा उसके विधिक उत्तराधिकारी बनाम GEJO (मृतक) द्वारा उसके विधिक उत्तराधिकारी एवं अन्य, (2024) 2 SCC 416

उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्न
क्या किसी विक्रय विलेख (Sale Deed) की वैधानिक प्रभावशीलता (date of operation) उसके निष्पादन (execution) की तिथि से मानी जाएगी या पंजीकरण (registration) की तिथि से? और क्या विक्रय विलेख में एकतरफा परिवर्तन का कोई विधिक प्रभाव होता है?

न्यायालय द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांत
सुप्रीम कोर्ट ने पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 47 की भाषा का सरल और स्पष्ट रूप में व्याख्या करते हुए निम्नलिखित सिद्धांत प्रतिपादित किए:

  1. धारा 47 कहती है कि कोई पंजीकृत दस्तावेज़ उसी तिथि से प्रभावी होगा जिस तिथि से वह प्रभावी होता, यदि पंजीकरण की आवश्यकता न होती।
  2. अतः यदि किसी दस्तावेज़ (जैसे विक्रय विलेख) का पंजीकरण आवश्यक है और उसे विधिपूर्वक पंजीकृत कर दिया गया है, तो वह निष्पादन की तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा, न कि पंजीकरण की तिथि से।
  3. उदाहरणार्थ, यदि किसी संपत्ति के विक्रय विलेख में सभी तयशुदा धनराशि का भुगतान निष्पादन के समय या उससे पूर्व कर दिया गया हो, तो पंजीकरण के पश्चात उसका प्रभाव निष्पादन की तिथि से माना जाएगा।
  4. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Ram Saran Lall v. Domini Kuer, AIR 1961 SC 1747 का निर्णय केवल विक्रय के पूर्ण होने (completion of sale) की वैधानिक स्थिति पर है, न कि विक्रय विलेख के प्रभावी होने की तिथि पर।
  5. विक्रय विलेख में एकतरफा परिवर्तन (Unilateral Changes) का कोई वैधानिक प्रभाव नहीं होता, क्योंकि ऐसे परिवर्तन बिना सभी पक्षों की सहमति के विधिसम्मत नहीं होते। यह दस्तावेज़ की निष्पक्षता और वैधता को प्रभावित करता है।

प्रासंगिक विधिक प्रावधान

  1. Section 47, Registration Act, 1908 – पंजीकृत दस्तावेज़ निष्पादन की तिथि से प्रभावी माने जाते हैं, न कि पंजीकरण की तिथि से।
  2. Section 54, Transfer of Property Act, 1882 – ₹100/- से अधिक मूल्य की संपत्ति का विक्रय विलेख पंजीकृत होना अनिवार्य है।
  3. Ram Saran Lall v. Domini Kuer, AIR 1961 SC 1747 – केवल विक्रय की पूर्तता के विषय में निर्णय; प्रभाव की तिथि से संबंधित नहीं।

न्यायसम्मत निष्कर्ष
Kanwar Raj Singh बनाम GEJO मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई विक्रय विलेख विधिपूर्वक निष्पादित हुआ हो और बाद में उसका पंजीकरण हो गया हो, तो वह निष्पादन की तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा, न कि पंजीकरण की तिथि से। साथ ही, किसी दस्तावेज़ में एकतरफा संशोधन विधिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है और उसका कोई वैधानिक बल नहीं होता। यह निर्णय संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की वैधता और प्रभावशीलता के निर्धारण हेतु एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है।

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