काठमांडू में राजशाही समर्थक आंदोलन हिंसक, प्रशासन ने टिंकुने, कोटेश्वर और सीनामंगल में कर्फ्यू लगाया
नेपाल की राजधानी काठमांडू में शुक्रवार दोपहर उस समय स्थिति बिगड़ गई जब राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हिंसक हो गईं। इसके चलते जिला प्रशासन कार्यालय ने स्थानीय प्रशासन अधिनियम की धारा 6(क) के तहत टिंकुने, कोटेश्वर और सीनामंगल क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया। यह कर्फ्यू शनिवार सुबह तक के लिए बढ़ा दिया गया, जिसमें लोगों की आवाजाही, सभाएं, रैलियां और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए।
जानकारी के अनुसार, लगभग 10,000 से 15,000 लोग इस आंदोलन में शामिल थे। झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। विभिन्न स्थानों पर आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं और करीब 14 इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया है। मरने वालों में *एवेन्यूज टेलीविज़न* के पत्रकार सुरेश रजक भी शामिल हैं, जो एक जलती हुई इमारत में फंसे रह गए और समय पर रेस्क्यू न होने के कारण उनकी मौत हो गई। चैनल के मालिक भास्कर राज राजकर्णिकार के अनुसार, पुलिस को समय पर सूचना दी गई थी, लेकिन रजक को बचाया नहीं जा सका।
प्रदर्शन पहले से ही जिला प्रशासन की अनुमति से आयोजित किए जा रहे थे, जिसमें समाजवादी मोर्चा, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) और राजशाही समर्थक समूह शामिल थे। राजशाही समर्थक समूह का नेतृत्व दुर्गा प्रसाई कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) का नेतृत्व राजेन्द्र लिंगदेन कर रहे हैं। इनकी मांग है कि नेपाल में राजशाही को पुनः बहाल किया जाए।
मुख्य जिला अधिकारी ऋषिराम तिवारी ने बताया कि समाजवादी मोर्चा को भृकुटीमंडप में प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, जबकि प्रसाई के समूह को टिंकुने में रैली की इजाजत मिली थी। उप-महानिरीक्षक (DIG) दिनेश कुमार आचार्य के अनुसार, प्रदर्शन क्षेत्रों में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। लेकिन जब राजशाही समर्थकों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग किया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने प्रदर्शन आयोजकों से शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन पहले ही दिन से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस को कर्फ्यू उल्लंघन करने वालों पर गोली चलाने तक की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा, राजधानी के बाहर से आने वाले वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया। शनिवार सुबह 7 बजे से बनेश्वर-टिंकुने क्षेत्र में कर्फ्यू हटा लिया गया है।
शुक्रवार को हुई हिंसा के मामले में कुल 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें आरपीपी नेता रविंद्र मिश्रा, धवल शमशेर राणा, और अन्य राजशाही समर्थक कार्यकर्ता जैसे शेफर्ड लिम्बू और संतोष तामांग शामिल हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई।
गौरतलब है कि नेपाल में 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद से अब तक 16 वर्षों में 14 बार सरकारें बदली हैं। इस राजनीतिक अस्थिरता का देश की आर्थिक प्रगति पर नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे युवा वर्ग का विदेश पलायन बढ़ा है, भ्रष्टाचार में इजाफा हुआ है और जनता में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। माओवादी नेता पुष्पकमल दाहाल और अन्य नेताओं ने राजशाही की पुनः स्थापना का कड़ा विरोध जताया है।
