अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तीन वर्ष पूरे होने के बाद, देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगातार सख्त होते जा रहे हैं। हाल ही में यूरोपीय संघ शरण एजेंसी (EUAA) द्वारा प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में तालिबान द्वारा लागू किए गए ‘नैतिकता कानून’ (Morality Law) की विस्तार से जानकारी दी गई है, जो अफगान समाज पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।
यह कानून 21 अगस्त 2024 को तालिबान की ओर से घोषित किया गया था। इसके तहत आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति, आवाज़ और पहनावे पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए हैं। मीडिया में मानव और पशु आकृतियों के चित्र या वीडियो दिखाने पर भी रोक लगाई गई है, जिससे न केवल पत्रकारिता बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर भी असर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कानून शरिया कानून के नाम पर लागू किया जा रहा है, लेकिन इसमें दिए गए निर्देश इतने अस्पष्ट हैं कि उनका क्रियान्वयन अक्सर भ्रामक या असंगत होता है। अलग-अलग प्रांतों में कानून का प्रवर्तन अलग तरीके से हो रहा है, जिससे मानवाधिकारों की स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है।
महिलाओं की स्थिति बद से बदतर
हालाँकि वर्ष 1996 से 2001 के तालिबान शासन की तुलना में इस बार कुछ क्षेत्रों में प्रवर्तन थोड़ा नरम है, फिर भी महिलाओं और लड़कियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, यात्रा और न्याय तक पहुँच आज भी गंभीर रूप से बाधित है। महिला प्रधान परिवारों को तो विशेष तौर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बिना पुरुष अभिभावक के सार्वजनिक स्थलों या सेवाओं तक पहुँचना उनके लिए लगभग असंभव बना दिया गया है।
तालिबान द्वारा एकदलीय शासन प्रणाली पर ज़ोर दिए जाने के चलते राजनीतिक विरोध को भी कुचलने का प्रयास जारी है। स्वतंत्र मीडिया लगभग निष्क्रिय हो चुका है और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के अनुसार अफगानिस्तान अब प्रेस स्वतंत्रता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे खराब देश बन गया है।
सुरक्षा स्थिर, लेकिन मानवीय संकट जारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संघर्ष संबंधी हिंसा में कमी आई है क्योंकि तालिबान के शासन को चुनौती देने वाले किसी भी समूह में अब पर्याप्त शक्ति नहीं बची है। लेकिन दूसरी ओर, देश में खाद्य संकट, कुपोषण और मानवीय सहायता की भारी कमी जैसी समस्याएँ गहराती जा रही हैं।
यूरोपीय संघ में अफगान शरणार्थी स्थिति
EUAA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनवरी से अगस्त 2024 के बीच अफगान नागरिक यूरोपीय संघ में शरण के लिए आवेदन करने वाले दूसरे सबसे बड़े समूह रहे। इस अवधि में लगभग 60,000 आवेदन दर्ज किए गए, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत कम हैं।

इनमें से 40 प्रतिशत से अधिक आवेदन जर्मनी में दर्ज किए गए। इसी अवधि में EU+ देशों ने 66,000 से अधिक प्रथम चरण निर्णय जारी किए, जिनमें से 65 प्रतिशत में शरणार्थियों को सुरक्षा प्रदान की गई। 63,000 से अधिक मामले अभी भी निर्णय की प्रतीक्षा में हैं।
तालिबान का नया नैतिकता कानून न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों के लिए खतरा है, बल्कि इससे अफगान समाज की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है। यूरोपीय संघ की रिपोर्ट अफगान नागरिकों की दुर्दशा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करती है, जिससे यह अपेक्षा की जा रही है कि वैश्विक समुदाय तालिबान की नीतियों की समीक्षा और मानवीय सहायता के लिए ठोस कदम उठाएगा।