ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कराई जाएगी व्यापक ट्री सेंसस, बिना अनुमति नहीं कटेंगे पेड़

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प्रकरण शीर्षक: एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ व अन्य |

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) में पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाने और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत ट्री सेंसस (वृक्ष जनगणना) कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक क्षेत्र में मौजूद पेड़ों की वास्तविक संख्या और स्थिति का रिकॉर्ड नहीं होगा, तब तक कानून को लागू नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने ट्री सेंसस की जिम्मेदारी फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI), देहरादून को सौंपने का निर्देश दिया है। TTZ प्राधिकरण को एक सप्ताह के भीतर FRI को औपचारिक रूप से नियुक्त करने का आदेश भी दिया गया है। साथ ही FRI को ट्री सेंसस की प्रक्रिया, कार्ययोजना और समयसीमा बताते हुए शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने क्या कहा:

“जब तक पेड़ों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा, अधिनियम की धाराओं को लागू नहीं किया जा सकता। यह डेटा केवल विस्तृत ट्री सेंसस से ही प्राप्त किया जा सकता है,” कोर्ट ने कहा।

इस मामले की सुनवाई वर्षों से चल रही है और कोर्ट ने पहले भी TTZ में अवैध पेड़ कटान पर चिंता जताई थी। नवंबर 2023 में कोर्ट ने ट्री सेंसस की आवश्यकता और निगरानी तंत्र स्थापित करने की बात कही थी। एक याचिका के जरिए यह भी अनुरोध किया गया था कि अवैध पेड़ कटान की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जाए।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछले चार वर्षों में क्षेत्र की वनस्पति कवर में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने यह भी बताया कि कई ऐसे पेड़, जिन्हें ‘सुरक्षित पेड़’ घोषित किया गया था, वे भी अवैध रूप से काटे गए। इस पर कोर्ट ने SHO को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की संभावना पर विचार करने को कहा।


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 8 मई 2015 का आदेश, जिसके अनुसार TTZ क्षेत्र में कोई भी पेड़ सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना नहीं काटा जा सकता, आगे भी प्रभावी रहेगा। इसके अतिरिक्त, “एग्रो-फॉरेस्ट्री” गतिविधियों पर भी 1976 अधिनियम की धाराएं लागू होंगी, यानि बिना पूर्व अनुमति कोई पेड़ नहीं काटा जा सकेगा।

न्यायमूर्ति ओका ने यह भी कहा कि “एग्रो-फॉरेस्ट्री” जैसे शब्द अस्पष्ट हैं, और इनके बहाने कोई भी पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने इस पर आशंका जताई कि कुछ व्यावसायिक हित समूह इन शर्तों को ढील देकर लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।


यह निर्णय न केवल TTZ की हरियाली बचाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देशभर में पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक मिसाल भी है। अब सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर इस ट्री सेंसस को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से संपन्न करना होगा।

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