26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की जान गई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। इस हमले की साजिश में शामिल रहे पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। 10 अप्रैल 2025 को उन्हें विशेष विमान से नई दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर लाया गया, जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें गिरफ्तार किया।
तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के साहीवाल जिले में हुआ था। वे पाकिस्तानी सेना में चिकित्सा अधिकारी थे और बाद में कनाडा के नागरिक बन गए। बाद में, उन्होंने अमेरिका में फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज नामक कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी उनके सहपाठी डेविड कोलमैन हेडली को भारत आने और मुंबई की टोह लेने के लिए कवर प्रदान करती थी।
2009 में, अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने तहव्वुर राणा और डेविड कोलमैन हेडली को मुंबई और डेनमार्क में हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया। हेडली ने सरकारी गवाह बनकर राणा की भूमिका का खुलासा किया। अमेरिकी अदालत ने राणा को डेनमार्क साजिश का दोषी ठहराया और 14 साल की सजा सुनाई, लेकिन मुंबई हमले के आरोपों से बरी कर दिया।
2020 में, एनआईए ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया। राणा ने अमेरिकी अदालतों में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिकाएं दायर कीं, लेकिन अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद, उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया गया।

भारत पहुंचने पर, तहव्वुर राणा को एनआईए ने गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ मुकदमा दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत में चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र मान को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है।
तहव्वुर राणा की भारत में वापसी 26/11 हमले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल हमले की साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी, बल्कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) की भूमिका पर भी प्रकाश पड़ेगा। भारत सरकार और एनआईए की यह सफलता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।