वसीयत की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला धारा 63(c) की स्पष्ट व्याख्या

न्यायिक निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने Gopal Krishan and Others बनाम Daulat Ram and Others, [2025] 1 S.C.R. 93 के मामले में वसीयत की वैधता से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर निर्णय सुनाते हुए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 63(c) की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। इस मामले में वसीयतकर्ता एस आर जो एक भूस्वामी था और जिसकी कोई संतान नहीं थी अपने भतीजे जी के के साथ रहता था। उसने 07 नवम्बर 2005 को एक वसीयत तैयार की और अगले दिन उसका निधन हो गया। वसीयत के अनुसार जी के को संपत्ति प्राप्त हुई थी जिसे उसने अपने पुत्रों के नाम स्थानांतरित कर संयुक्त रूप से बेच दिया। बाद में प्रतिवादीगण ने वसीयत को जाली और मनगढ़ंत बताते हुए दीवानी वाद दायर किया।

ट्रायल कोर्ट ने वसीयत पर अविश्वास जताया परंतु निचली अपीलीय अदालत ने वसीयत को वैध ठहराया। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को पलट दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जहां न्यायालय ने पाया कि गवाह डी डब्ल्यू एक ने स्पष्ट रूप से वसीयतकर्ता को वसीयत पर हस्ताक्षर करते हुए देखा था। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि धारा 63(c) में प्रयुक्त ‘या’ शब्द यह दर्शाता है कि गवाहों द्वारा वसीयतकर्ता को हस्ताक्षर करते हुए देखना ही पर्याप्त है और अन्य वैकल्पिक शर्तों को एक साथ पूरा करना अनिवार्य नहीं है।

न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय को विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया और निचली अपीलीय अदालत का आदेश बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत वैध है और संपत्ति का हस्तांतरण और विक्रय भी विधिसम्मत है।

इस निर्णय के दूरगामी प्रभावों में यह शामिल है कि वसीयतों की वैधता के आकलन में गवाहों की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी न्यायालयों को धारा 63(c) की वैकल्पिक शर्तों के बीच उचित अंतर समझने का मार्गदर्शन मिलेगा और केवल तकनीकी आपत्तियों के आधार पर वसीयतों को अवैध ठहराने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। इसके अतिरिक्त इस निर्णय से उत्तराधिकार विवादों के शीघ्र समाधान की संभावना बढ़ेगी और विधिक सलाह लेकर वसीयत बनाने की प्रवृत्ति को बल मिलेगा।

Gopal Krishan and Others बनाम Daulat Ram and Others, [2025] 1 S.C.R. 93 का यह फैसला वसीयत कानून की व्याख्या में स्थायित्व और पारदर्शिता लाने वाला एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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