विदेशी नागरिक Frank Vitus की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला ऐतिहासिक निर्णय

न्यायिक निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने Frank Vitus बनाम Narcotics Control Bureau and Others, [2025] 1 S.C.R. 184 के मामले में विदेशी नागरिकों की जमानत और डिजिटल निगरानी से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्नों पर निर्णय सुनाया। Frank Vitus नामक एक विदेशी नागरिक को भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर आरोपों के तहत नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम 1985 की धारा 8(ग), धारा 21(ग) और धारा 37 के तहत गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे सशर्त जमानत प्रदान की थी जिसमें एक विवादास्पद शर्त यह थी कि आरोपी को अपनी लाइव लोकेशन Google Maps के माध्यम से जांच अधिकारी के साथ साझा करनी होगी। Frank Vitus ने इस शर्त को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने NDPS अधिनियम के साथ साथ Foreigners Act, 1946 तथा Foreigners Order, 1948 और Registration of Foreigners Rules, 1992 के प्रावधानों का भी विस्तार से विश्लेषण किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी नागरिक की निगरानी का कार्य प्रशासनिक अधिकारियों का है न कि अदालतों का और जमानत आदेश के साथ Google Location जैसी शर्त लगाना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि नागरिक प्राधिकारी या पंजीकरण अधिकारी को जमानत याचिका में पक्षकार बनाना आवश्यक नहीं है जब तक कि Foreigners Act की धारा 14 के अंतर्गत कोई आरोप न हो।

न्यायालय ने संतुलन बनाते हुए यह व्यवस्था दी कि जमानत आदेश की प्रति पंजीकरण अधिकारी को भेजी जाएगी जो इसे नागरिक प्राधिकारी और अन्य संबद्ध एजेंसियों को प्रेषित करेगा ताकि निगरानी के प्रशासनिक उपाय किए जा सकें। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति के निजता के अधिकार और राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया।

इस निर्णय के दूरगामी प्रभावों में यह शामिल है कि विदेशी नागरिकों की जमानत प्रक्रिया अब अधिक स्पष्ट और सरल होगी Google Location जैसी डिजिटल निगरानी शर्तों पर पुनर्विचार होगा NDPS मामलों में विदेशी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को बल मिलेगा तथा प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही को लेकर न्यायिक स्पष्टता आएगी। इसके अतिरिक्त निजता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी भविष्य में एक न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

Frank Vitus बनाम Narcotics Control Bureau and Others, [2025] 1 S.C.R. 184 का यह फैसला भारतीय न्यायिक प्रणाली में व्यक्तिगत स्वतंत्रता तकनीकी हस्तक्षेप और राज्य नियंत्रण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। यह निर्णय आने वाले समय में विदेशी नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मामलों में न्यायालयों को मार्गदर्शन प्रदान करेगा और मानवाधिकारों की रक्षा तथा विधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *