Category: न्यायिक प्रक्रिया
तमिलनाडु के विधेयकों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय – संवैधानिक प्रावधान, मुद्दा और भविष्यगत प्रभाव
दिनांक 8 अप्रैल 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित 10 विधेयकों को स्वीकृति प्रदान कर दी। यह विधेयक लम्बे समय से राज्यपाल के पास लंबित थे, जिनमें से 7 विधेयकों को राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकार किया जा चुका […]
Continue Readingमुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का नोटिस: एसएससी भर्ती घोटाले पर टिप्पणी बनी विवाद का कारण
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने के चलते अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस अधिवक्ता सिद्धार्थ दत्ता द्वारा एनजीओ ‘आत्मदीप’ की ओर से भेजा गया है। यह मामला 3 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में 25,000 से अधिक […]
Continue Reading26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा भारत लाए गए: गिरफ्तारी से प्रत्यर्पण तक की पूरी कहानी
26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की जान गई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। इस हमले की साजिश में शामिल रहे पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। 10 अप्रैल 2025 को उन्हें विशेष विमान से नई दिल्ली के […]
Continue Readingजॉन मार्शल: अमेरिकी न्यायपालिका के स्थापत्य शिल्पी
अमेरिकी इतिहास में, जॉन मार्शल का नाम एक ऐसे मुख्य न्यायाधीश के रूप में अंकित है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को परिभाषित किया और अमेरिकी संविधान की व्याख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 24 सितंबर 1755 को वर्जीनिया कॉलोनी में जन्मे मार्शल ने अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध में भाग लिया और बाद में विधि का अध्ययन […]
Continue Readingभारत और नेपाल के सर्वोच्च न्यायालयों के बीच न्यायिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
भारत के सर्वोच्च न्यायालय और नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने आज न्यायिक क्षेत्र में सहयोग को विकसित करने, बढ़ावा देने और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और नेपाल के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश मान सिंह राउत की उपस्थिति में […]
Continue Readingछत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय: स्थापना, अधिकार क्षेत्र और ऐतिहासिक महत्व
1 नवम्बर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, उसी दिन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) की भी स्थापना की गई। यह भारत के नवनिर्मित उच्च न्यायालयों में से एक है और देश का उन्नीसवां (19वां) उच्च न्यायालय माना जाता है। इस न्यायालय की स्थापना मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत की गई […]
Continue Readingभारत का प्रथम उच्च न्यायालय: कोलकाता उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक गौरव और क्षेत्राधिकार
कोलकाता उच्च न्यायालय भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है। यह पश्चिम बंगाल राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह केंद्र शासित प्रदेश पर क्षेत्राधिकार रखता है। इस न्यायालय की इमारत का डिज़ाइन बेल्जियम के यपरेस (Ypres) शहर में स्थित ‘क्लॉथ हॉल’ (Cloth Hall) पर आधारित है, जिसे सरकारी वास्तुविद श्री वॉल्टर ग्रानविल द्वारा तैयार […]
Continue Readingबॉम्बे हाईकोर्ट का इतिहास और विकास
बॉम्बे हाईकोर्ट की स्थापना 14 अगस्त 1862 को की गई थी। इस उच्च न्यायालय को मूल (Original) और अपील (Appellate) दोनों प्रकार की अधिकारिता प्राप्त थी। मूल अधिकारिता सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त हुई थी, जबकि अपीलीय अधिकारिता “सदर दीवानी” और “सदर फौजदारी अदालतों” से आई थी, जिन्हें उच्च न्यायालय में विलीन कर दिया गया था। […]
Continue Readingआंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय: इतिहास, पुनर्गठन और अमरावती से नई शुरुआत
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी, जब आंध्र राज्य का गठन मद्रास प्रेसीडेंसी से अलग होकर किया गया था। उस समय इसका प्रधान पीठ गुंटूर में स्थित था। वर्ष 1956 में हैदराबाद राज्य और आंध्र राज्य का विलय हुआ और आंध्र प्रदेश राज्य का निर्माण हुआ। इसके बाद उच्च न्यायालय […]
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