मामला और संदर्भ
Siby Thomas v. M/s. Somany Ceramics Ltd., (2024) 1 SCC 348
उठाया गया मुख्य संवैधानिक/विधिक प्रश्न
क्या शिकायत में पर्याप्त और विशिष्ट तथ्यात्मक आरोप न होने पर अभियुक्त पर धारा 138 के अंतर्गत धारा 141(1) के माध्यम से प्रत्यायोजित (vicarious) दायित्व आरोपित किया जा सकता है?
बहुमत निर्णय
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ ने यह निर्णय दिया कि धारा 141(1) की भाषा स्पष्ट है—केवल वही व्यक्ति जो अपराध के समय कंपनी के कार्यों का प्रभार संभाले हुए था तथा कंपनी के व्यापार के संचालन के लिए उत्तरदायी था, वही अभियुक्त माना जा सकता है।
न्यायालय ने दोहराया कि:
(1) केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि अभियुक्त कंपनी के प्रबंधन से जुड़ा हुआ है;
(2) शिकायत में यह स्पष्ट रूप से आरोपित होना चाहिए कि अभियुक्त उस समय कंपनी के व्यापार के संचालन के लिए उत्तरदायी था;
(3) यदि यह आवश्यक तथ्य शिकायत में नहीं हैं, तो अभियुक्त पर धारा 141(1) के अंतर्गत कोई प्रत्यायोजित दायित्व नहीं ठहराया जा सकता।
इस प्रकार न्यायालय ने अभियोजन के प्रारंभिक दायित्व की पुष्टि की कि वह शिकायत में स्पष्ट व आवश्यक आरोप लगाए जो धारा 141(1) की शर्तों को संतुष्ट करें।
अल्पमत विचार
कोई अल्पमत मत प्रकट नहीं किया गया। निर्णय सर्वसम्मत रहा।
प्रासंगिक विधिक प्रावधान
- Section 138 of NI Act – चेक के अनादरण की दशा में दंड का प्रावधान।
- Section 141(1) of NI Act – कंपनी के अधिकारियों की प्रत्यायोजित दायित्व के लिए उत्तरदायित्व की सख्त शर्तें।
निर्णय में उल्लिखित पूर्ववर्ती निर्णय और उनका सार (प्रत्येक 2 पंक्तियों में)
- SMS Pharmaceuticals Ltd. v. Neeta Bhalla, (2005) 8 SCC 89
न्यायालय ने कहा कि कंपनी के अधिकारी पर अभियोजन तभी चलेगा जब शिकायत में यह विशेष रूप से आरोपित हो कि वह कंपनी के कार्यों का संचालन करता था। इस निर्णय को इस मामले में मौलिक मानदंड के रूप में अपनाया गया। - National Small Industries Corp. Ltd. v. Harmeet Singh Paintal, (2010) 3 SCC 330
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि केवल कंपनी का निदेशक होने मात्र से दायित्व नहीं बनता जब तक यह विशेष रूप से साबित न किया जाए कि वह कंपनी के दैनिक कार्यों का संचालन करता था। इसी कसौटी पर Siby Thomas का दायित्व नहीं बन पाया।
न्यायसम्मत निष्कर्ष
Siby Thomas v. M/s. Somany Ceramics Ltd. में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धारा 141(1) एन.आई. अधिनियम की भाषा अनिवार्य रूप से सख्त है और यदि शिकायत में अभियुक्त के व्यवसायिक दायित्व और अपराध के समय उसकी स्थिति का स्पष्ट वर्णन नहीं है, तो उस पर प्रत्यायोजित दायित्व आरोपित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय इस बात को पुनः स्थापित करता है कि आपराधिक उत्तरदायित्व में प्रत्येक तत्व का स्पष्ट और विधिक रूप से आरोपित होना अनिवार्य है, विशेषकर तब जब वह प्रत्यायोजित दायित्व हो।