जिला न्यायाधीश भर्ती में चौथे कोटे की एंट्री अवैध: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने न्यायिक सेवा में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) की नियुक्तियों में तथाकथित चौथे कोटे के नाम पर कोई बैकडोर एंट्री स्वीकार नहीं की जा सकती। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने दिनांक 4 अप्रैल 2025 को सुनाया।

यह मामला दो याचिकाओं से जुड़ा था – डॉ. सप्रा झुनझुनवाला द्वारा दायर रिट याचिका क्र. 308/2016

न्यायालय के महत्वपूर्ण अवलोकन और निर्देश:

  1. नियम 5(1)(c) को असंवैधानिक ठहराया गया:
    वर्ष 2016 में अधिसूचित नियम 5(1)(c), जो यह कहता है कि यदि अधिवक्ता कोटे की सीटें लगातार दो चयन प्रक्रियाओं तक रिक्त रहती हैं, तो उन्हें पदोन्नति द्वारा भरा जा सकता है – को न्यायालय ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 233(2) और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के खिलाफ है।
  2. न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियां भी रद्द:
    वर्ष 2016 और 2017 में इस प्रावधान के अंतर्गत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) को जिला न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। कोर्ट ने इन नियुक्तियों को भी रद्द कर दिया है, और निर्देश दिया है कि इन्हें 2007 और 2008 की अपनी मूल बैच में रखा जाए तथा उसी अनुसार इनकी वरिष्ठता तय की जाए।
  3. रिक्त सीटें अब अधिवक्ता कोटे से भरी जाएंगी:
    न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि आदेश के क्रियान्वयन की प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी करें और भविष्य में ऐसी सभी रिक्तियों को केवल अधिवक्ताओं के कोटे से भरा जाए।
  4. सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की पुन: पुष्टि:
    अदालत ने अपने फैसले में All India Judges Association, Dheeraj Mor, और Malik Mazhar Sultan मामलों में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को दोहराया और स्पष्ट किया कि अधिवक्ता कोटे की सीटें केवल अधिवक्ताओं से ही भरी जानी चाहिए।

न्यायालय का अंतिम आदेश:

न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नियम 5(1)(c) वैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है और इसे कानून की दृष्टि से अस्वीकार्य मानते हुए रद्द किया जाता है। वर्ष 2016 और 2017 की नियुक्तियां भी इस आधार पर रद्द की जाती हैं। संबंधित न्यायिक अधिकारियों को उनकी मूल बैच में रखा जाएगा और वरिष्ठता उसी आधार पर तय होगी। आगे से इस कोटे की सभी 25% नियुक्तियां केवल बार से सीधे चयन के माध्यम से ही की जाएंगी

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