एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त वाहन की सुपुर्दगी पर उच्चतम न्यायालय का व्यावहारिक दृष्टिकोण

न्यायिक निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने Bishwajit Dey बनाम The State of Assam, [2025] 1 S.C.R. 281 के मामले में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम 1985 तथा दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धाराओं के समन्वित उपयोग पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। इस मामले में एक वाहन को जांच चौकी पर रोका गया और तलाशी के दौरान तिरपाल के नीचे से साबुन के डिब्बों में छिपाकर रखी गई 24.8 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। वाहन जब्त कर लिया गया और एक तीसरे व्यक्ति को अभियुक्त बनाया गया जबकि वाहन स्वामी को अभियुक्त नहीं बनाया गया। अपीलकर्ता जो वाहन स्वामी था उसने न्यायालय से आग्रह किया कि उसका वाहन सुपुर्दगी पर छोड़ा जाए क्योंकि उसे वाहन के दुरुपयोग की जानकारी नहीं थी और उसकी कोई सहमति नहीं थी।

न्यायालय ने देखा कि विशेष न्यायाधीश के समक्ष आरोप पत्र दाखिल हो चुका है और वाहन स्वामी का कोई आपराधिक दायित्व स्थापित नहीं हुआ है। NDPS अधिनियम की धारा 51 और CrPC की धाराओं 451 तथा 457 का सहारा लेते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब्त संपत्ति की सुपुर्दगी पर कोई विशेष प्रतिबंध NDPS अधिनियम में नहीं है इसलिए सामान्य विधिक प्रावधानों का प्रयोग किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि मुकदमे के अंत तक वाहन को पुलिस अभिरक्षा में रखना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि खुले में रखे वाहन खराब हो जाते हैं जिससे उनकी आर्थिक कीमत घटती है।

न्यायालय ने अभियोजन के उस तर्क को भी अस्वीकार किया कि वाहन एक भौतिक साक्ष्य है जिसे सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। न्यायालय ने सुझाव दिया कि वाहन की वीडियोग्राफी फोटोग्राफ्स और दस्तावेजों के माध्यम से प्रमाण एकत्र किए जा सकते हैं और वाहन की बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगाई जा सकती है।

न्यायालय ने चार संभावित स्थितियों का विश्लेषण किया जहां वाहन से मादक पदार्थ जब्त होने की स्थिति में स्वामी की भूमिका निर्धारित की जा सकती है। यदि वाहन स्वामी का अपराध में संलिप्तता नहीं है और उसने पर्याप्त सावधानी बरती है तो उसका वाहन सुपुर्दगी पर छोड़ा जा सकता है।

इस निर्णय में न्यायालय ने व्यावहारिक और न्यायोचित दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट किया कि निर्दोष वाहन स्वामियों को अनुचित दंडित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही CrPC की धाराओं 451 और 457 के उपयोग को सही ठहराते हुए कहा कि जहां NDPS अधिनियम में कोई विशेष प्रावधान नहीं है वहां सामान्य विधिक सिद्धांत लागू किए जा सकते हैं।

यह निर्णय NDPS अधिनियम के तहत लंबित मामलों में निर्दोष वाहन मालिकों को राहत प्रदान करेगा पुलिस के विवेकाधीन अधिकारों पर नियंत्रण स्थापित करेगा ट्रायल कोर्ट्स में समान दृष्टिकोण सुनिश्चित करेगा और न्यायालयों को व्यावहारिकता के साथ कानून का पालन करने की दिशा में मार्गदर्शन करेगा। इसके अतिरिक्त यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएगा और इस बात को सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति पर दंड केवल तभी लगाया जाए जब स्वामी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सिद्ध हो।

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