जब तक विधिसम्मत बंटवारा न हो, वादी को उसके वर्तमान कब्जे से वंचित नहीं किया जा सकता

मामले एवं विश्लेषण

GANGUBAI RAGHUNATH AYARE बनाम GANGARAM SAKHARAM DHURI (मृत) द्वारा प्रतिनिधि और अन्य
SCR उद्धरण: [2025] 4 S.C.R. 184
निर्णय दिनांक: 17 मार्च 2025
न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह
प्रकरण प्रकार: सिविल अपील /3183/2009
निर्णय: अपील का निपटारा किया गया
न्यूट्रल सिटेशन: 2025 INSC 355

मुख्य बिंदु (हेडनोट):

वाद – आवश्यक पक्षकारों की अनुपस्थिति – ‘V’ (वादी का भाई एवं प्रतिवादी 3 से 5 का भी भाई) ने वंशानुगत संपत्ति में से ½ भाग प्रतिवादी 2 को बेच दिया।

वादी ने वंशानुगत संपत्ति के प्रशासन हेतु याचना की तथा विक्रय विलेख को शून्य घोषित करने का आग्रह किया।

ट्रायल कोर्ट ने संपत्ति के प्रशासन की मांग को अस्वीकृत किया, परंतु विक्रय विलेख को पूर्णतः अमान्य घोषित करते हुए प्रतिवादी 2 को ½ अंश का कब्जा लौटाने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार की।

निर्णय:
उच्च न्यायालय का यह मानना सही था कि जब ट्रायल कोर्ट ने संपत्ति के प्रशासन हेतु की गई मूल याचिका को अस्वीकृत कर दिया था, तो उसके उपरांत वादी द्वारा परोक्ष रूप से की गई बंटवारे की याचना भी तब तक नहीं मानी जा सकती, जब तक सभी आवश्यक पक्षकारों को वाद में सम्मिलित न किया गया हो।

वादी स्वयं केवल 1/5 अंश की स्वामिनी थी और प्रतिवादी 3 से 5 ने अपने हिस्से हेतु कोई पृथक वाद दायर नहीं किया था, अतः प्रतिवादी 2 के विरुद्ध कब्जे के लिए डिक्री देना उचित नहीं था।

वाद लंबित रहते हुए ‘V’ की मृत्यु हो गई, किंतु वादी ने केवल उसकी पत्नी को ही अभिसूचित किया, जबकि उसके पुत्रों-पुत्रियों को पक्षकार नहीं बनाया गया।

‘V’ को भी संपत्ति में केवल 1/5 अंश का अविभाजित स्वामित्व था। अतः प्रतिवादी 2 के पक्ष में की गई बिक्री वैध मानी जा सकती है, किंतु केवल उतने हिस्से तक ही।

अतः जब तक विधिसम्मत बंटवारा न हो, वादी को उसके वर्तमान कब्जे से वंचित नहीं किया जा सकता।

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