पाकिस्तान की सेना द्वारा कश्मीर मुद्दे पर फैलाया जा रहा झूठा राष्ट्रवाद न केवल भारत के विरुद्ध उकसावे की राजनीति को जन्म देता है, बल्कि स्वयं पाकिस्तान के नागरिकों को भी गहरे भ्रम में डालता है। जनरल असीम मुनीर की हालिया भड़काऊ बयानबाजी इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान की तथाकथित ‘DEEP स्टेट’ यानी सेना, एक सोची-समझी रणनीति के तहत कश्मीर को हथियार बनाकर देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचलना चाहती है। पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है, इसलिए वह बार-बार कश्मीर जैसे मुद्दों को उछालकर और हाल ही में पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को अंजाम देकर अपनी ही जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि देश में बढ़ती असंतोष, आर्थिक बदहाली और लोकतंत्र के दमन से जनता का ध्यान हटाया जा सके।
कश्मीर मुद्दा: सेना का राजनीतिक हथियार
जनरल मुनीर द्वारा “कश्मीर हमारी गले की नस है” जैसे बयानों के ज़रिए, पाकिस्तान की सेना जनता की भावनाओं को भड़काकर वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाना चाहती है। सेना जानती है कि शांति स्थापित हो गई तो उसके विशेषाधिकार और आर्थिक साम्राज्य को गहरा झटका लगेगा। इसलिए वह बार-बार कश्मीर मुद्दे को उछालती है।
इस्लामिक मिलिशिया का निर्माण: लोकतंत्र के विरुद्ध साज़िश
पाकिस्तान की सेना ने वर्षों से कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों को बढ़ावा देकर उन्हें मिलिशिया में तब्दील किया, जो अब न केवल कश्मीर में बल्कि खुद पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता फैला रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जाता है।
आर्थिक हित और सेना का वर्चस्व
पाकिस्तान की सेना केवल रक्षा मामलों तक सीमित नहीं है। वह बड़े उद्योगों, कृषि परियोजनाओं, बैंकिंग और रियल एस्टेट तक में गहरी घुसपैठ कर चुकी है। सेना की कंपनियां आम नागरिकों की प्रतिस्पर्धा को कुचलकर अपने आर्थिक लाभ को सर्वोपरि रखती हैं। इसलिए भी वह किसी तरह का स्थायी समाधान नहीं चाहती।
भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई: ‘ऑपरेशन सिंदूर’
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमापार स्थित आतंकी शिविरों पर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी गोलाबारी का नाटक किया, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा दबाव बढ़ा, तब पाकिस्तान ने 10 मई को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की।
लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान की सेना युद्धविराम की आड़ में फिर से घुसपैठ और गोलाबारी जैसे कृत्य कर रही है। क्योंकि उसे शांति नहीं, संघर्ष चाहिए — ताकि देश के भीतर उसकी पकड़ बनी रहे।
अमेरिकी दबाव की अनदेखी
जहां अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियां भारत-पाक के बीच संयम और स्थिरता की अपील कर रही हैं, वहीं पाकिस्तान की सेना ने अमेरिका की मध्यस्थता को दरकिनार करते हुए संघर्षविराम के उल्लंघन की नीति अपनाई है। यह साबित करता है कि पाकिस्तान की सेना का उद्देश्य युद्ध को टालना नहीं, बल्कि उसे जारी रखना है — चाहे उसके लिए देश को दांव पर क्यों न लगाना पड़े।
सैन्य ताकत में पाकिस्तान की कमजोरी
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा बजट $86.1 बिलियन था, जबकि पाकिस्तान का मात्र $10.2 बिलियन। यह अंतर पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी को दर्शाता है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की सेना कश्मीर मुद्दे को जीवित रखकर अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कोशिश करती है।
आतंकवाद का खुला समर्थन
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि पाकिस्तान ने तीन दशकों तक आतंकवाद को पाल-पोस कर पश्चिम के लिए “गंदा काम” किया। यह स्वीकारोक्ति इस बात की पुष्टि है कि पाकिस्तान की नीति आतंकवाद को संरक्षण देना और अपने सैन्य स्वार्थों के लिए उसका प्रयोग करना रही है।
बलूचिस्तान, सिंध और POK में अत्याचार
बलूचिस्तान और सिंध में पाकिस्तान की सेना द्वारा हजारों लोगों का जबरन गायब किया जाना, extrajudicial हत्याएं, और इंटरनेट बैन जैसे अमानवीय कृत्य, यह दर्शाते हैं कि यह सेना केवल कश्मीर के नाम पर नहीं, पूरे पाकिस्तान को एक सैन्य छावनी बनाकर लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है।
डिजिटल युग में सच छुपाना असंभव
आज के डिजिटल युग में पाकिस्तान अपने अत्याचारों को ज्यादा दिन तक छुपा नहीं सकता। बलूच नागरिक, पाक अधिकृत कश्मीर के लोग और निर्वासित कार्यकर्ता सोशल मीडिया, स्वतंत्र मीडिया और वैश्विक मंचों के जरिए पाकिस्तान की असलियत को दुनिया के सामने ला रहे हैं।
पाकिस्तान की सेना कश्मीर को एक बहाना बनाकर न केवल भारत को निशाना बनाती है, बल्कि वह अपने ही देश को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर नष्ट कर रही है। बलूचिस्तान हो या सिंध, या फिर अफगानिस्तान और बांग्लादेश में पाकिस्तान की ऐतिहासिक भूमिका — हर जगह उसकी सेना की नीति ने खून, दर्द और विभाजन ही छोड़ा है।
सेना लोकतंत्र को खत्म कर, एक कट्टरपंथी सैन्य शासन बनाना चाहती है जो सिर्फ़ झूठे राष्ट्रवाद पर टिक सके। लेकिन अब दुनिया इसे देख रही है। और पाकिस्तान के लोग भी।