SAURAV YADAV & ORS. v. STATE OF UTTAR PRADESH & ORS. (2020) 11 SCR 281 | Misc. Appl. No. 2641/2019 in SLP (C) No. 23223/2018
मुख्य मुद्दा:
उत्तर प्रदेश पुलिस में 2013 की भर्ती में ‘OBC महिला’ और ‘SC महिला’ उम्मीदवारों द्वारा ‘जनरल महिला’ श्रेणी में चयन का दावा किया गया था, क्योंकि उनकी अंक संख्या ‘जनरल महिला’ की कट-ऑफ से अधिक थी। राज्य सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2016 के निर्णय के आधार पर इन उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि विशेष श्रेणी (जैसे OBC) का कोई उम्मीदवार उच्च अंक प्राप्त करता है तो भी उसे जनरल श्रेणी में नहीं लाया जा सकता।
महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न:
- क्या आरक्षण की व्यवस्था में क्षैतिज (horizontal) और ऊर्ध्व (vertical) आरक्षण के बीच पारदर्शी समायोजन के बिना, उच्च अंक प्राप्त उम्मीदवार को जनरल श्रेणी में स्थान नहीं दिया जा सकता?
- क्या ऐसी व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 16 (लोक सेवाओं में अवसर की समानता) के खिलाफ है?
प्रासंगिक विधि और प्रकरण:
- संविधान का अनुच्छेद 14, 15(3), 16(1), 16(4)
- Indra Sawhney v. Union of India [(1992) Supp (3) SCC 217]
- Rajesh Kumar Daria v. RPSC [(2007) 8 SCC 785]
- Swati Gupta v. State of U.P. [(1995) 2 SCC 560]
- Anil Kumar Gupta v. State of U.P. [(1995) 5 SCC 173]
- Hanuman Dutt Shukla v. State of U.P. [(2018) 16 SCC 447]
- Charushila v. State of Maharashtra [2019 SCC OnLine Bom 1519]
बहुमत निर्णय (न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय):
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘दूसरा दृष्टिकोण’ (इलाहाबाद और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का) न्यायसंगत नहीं है क्योंकि यह योग्यता की अवहेलना करता है। किसी भी उम्मीदवार को केवल इसलिए जनरल श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि वह किसी आरक्षित श्रेणी (जैसे OBC) से संबंधित है, यदि उसके अंक जनरल श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि यदि क्षैतिज आरक्षण से संबंधित उम्मीदवार (जैसे OBC महिला) जनरल श्रेणी में चयन योग्य है तो उसे वहीं स्थान दिया जाना चाहिए, अन्यथा यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विरुद्ध होगा।
इसलिए, जिन OBC महिला उम्मीदवारों के अंक 274.8928 से अधिक थे, उन्हें जनरल महिला श्रेणी में नियुक्ति दी जानी चाहिए। हालांकि SC महिला उम्मीदवारों के अंक इस कट-ऑफ से कम होने के कारण उन्हें राहत नहीं दी गई।
न्यायालय ने ‘दूसरे दृष्टिकोण’ को अस्वीकार किया और ‘पहले दृष्टिकोण’ (राजस्थान, बॉम्बे, उत्तराखंड और गुजरात उच्च न्यायालयों का) को स्वीकार किया, जिसमें कहा गया था कि जनरल श्रेणी सभी के लिए खुली है और उसमें केवल योग्यता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, न कि सामाजिक श्रेणी का।
अंतिम निर्देश:
- सभी OBC महिला उम्मीदवार जिनके अंक 274.8928 से अधिक हैं, उन्हें यूपी पुलिस में नियुक्ति दी जाए।
- नियुक्ति पत्र 4 सप्ताह में भेजे जाएं और आवश्यक औपचारिकताएं 3 सप्ताह में पूरी हों।
- उनके सेवा लाभ (जैसे वरिष्ठता और वेतन निर्धारण) नियुक्ति तिथि से लागू माने जाएं।
- पहले से नियुक्त सामान्य महिला उम्मीदवारों की स्थिति प्रभावित नहीं की जाएगी।
यह निर्णय आरक्षण प्रणाली में योग्यता को सर्वोपरि रखने की संवैधानिक भावना को दृढ़ करता है और क्षैतिज तथा ऊर्ध्व आरक्षण के समायोजन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता की वकालत करता है।