न्यायपालिका की पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का संघर्ष: RTI कानून के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की जवाबदेही

विधि विशेष

Central Public Information Officer, Supreme Court of India बनाम Subhash Chandra Agarwal
न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
निर्णय तिथि: 13 नवम्बर 2019
सिविल अपील सं. 10044, 10045, 2683 / 2010

मुख्य मुद्दे:

  1. क्या मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय “लोक प्राधिकारी” (public authority) है और RTI अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सूचना प्रदान करने के लिए बाध्य है?
  2. क्या न्यायाधीशों द्वारा घोषित संपत्ति की जानकारी गोपनीय मानी जाएगी या सार्वजनिक हित में इसका प्रकटीकरण किया जा सकता है?
  3. क्या मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय दो अलग-अलग सार्वजनिक प्राधिकारी हैं?
  4. क्या RTI अधिनियम की धारा 8(1)(e) (फिड्युशियरी संबंध) और 8(1)(j) (निजता का अधिकार) न्यायाधीशों द्वारा दी गई जानकारी के खुलासे पर रोक लगाती हैं?

प्रासंगिक विधिक प्रावधान:

RTI अधिनियम, 2005:

धारा 2(h): लोक प्राधिकारी की परिभाषा

धारा 2(f): सूचना की परिभाषा

धारा 8(1)(e): फिड्युशियरी संबंध में प्राप्त सूचना का अपवाद

धारा 8(1)(j): निजता के उल्लंघन से संबंधित सूचना का अपवाद

धारा 11: तृतीय पक्ष से संबंधित सूचना

धारा 22: अन्य अधिनियमों पर वरीयता

संविधान का अनुच्छेद 124: सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना

न्यायालय द्वारा बहुमत का निर्णय (Ranjan Gogoi, Sanjiv Khanna, N.V. Ramana, Dr. D.Y. Chandrachud, Deepak Gupta, JJ.):

  1. मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी RTI अधिनियम के अंतर्गत आता है और यह सर्वोच्च न्यायालय का ही हिस्सा है।
  2. जजों द्वारा घोषित संपत्ति की सूचना सामान्य सूचना है और उसे सार्वजनिक किया जा सकता है जब तक कि उसमें व्यक्तिगत विवरण न मांगा गया हो; उस स्थिति में धारा 8(1)(j) और धारा 11 की प्रक्रिया अपनानी होगी।
  3. यह जानकारी फिड्युशियरी संबंध में नहीं मानी जा सकती, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश केवल कार्यालयीन कार्यवाही में सूचना संग्रह करते हैं।
  4. निजता का अधिकार तब लागू होगा जब विवरण मांगा गया हो, जैसे आय, देनदारी, निवेश, आदि। लेकिन यदि केवल यह पूछा गया हो कि किसी न्यायाधीश ने अपनी संपत्ति घोषित की है या नहीं, तो यह जनहित में प्रकटीकरण योग्य है।
  5. सूचना का अधिकार और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है — पारदर्शिता से न्यायपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है, परंतु न्यायिक कार्यवाहियों की गोपनीयता भी महत्त्वपूर्ण है।
  6. RTI अधिनियम के तहत मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय सार्वजनिक प्राधिकारी है।
  7. न्यायाधीशों की संपत्ति घोषणा की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
  8. धारा 8 और 11 के अपवाद केवल तभी लागू होंगे जब सूचना से निजता का गंभीर उल्लंघन हो या वह तृतीय पक्ष से संबंधित हो।
  9. न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि न्यायपालिका जवाबदेही से मुक्त हो; पारदर्शिता भी आवश्यक है।

महत्वपूर्ण उद्धरण:

“न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही एक दूसरे के पूरक हैं।” — Dr. D.Y. Chandrachud, J.
“जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिन पर उन्होंने विश्वास किया है, वे न्यायोचित आचरण कर रहे हैं।” — निर्णय की आत्मा

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