पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने के चलते अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस अधिवक्ता सिद्धार्थ दत्ता द्वारा एनजीओ ‘आत्मदीप’ की ओर से भेजा गया है। यह मामला 3 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में 25,000 से अधिक स्कूल नौकरियों को अवैध घोषित करने के फैसले से संबंधित है।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने बर्खास्त शिक्षकों के साथ एक बैठक में कहा था, “जब तक मैं जिंदा हूँ, किसी की नौकरी नहीं जाएगी। अगर वो मुझे जेल में डाल दें तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।” इस बयान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना गया है।

नोटिस में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि वे सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने से बचें जो लोगों में यह आशा उत्पन्न करें कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू नहीं होगा, और उनसे बिना शर्त माफी की मांग की गई है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने इस नोटिस को मुख्यमंत्री के प्रयासों को बाधित करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री न्यायपालिका का सम्मान करती हैं और यदि कोई निर्णय बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ है, तो उसके पुनर्विचार की मांग करना अदालत की अवमानना नहीं है।
यह मामला न्यायपालिका के आदेशों के पालन और सार्वजनिक बयानों की सीमाओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।