संसद में 9 अगस्त 2024 को प्रस्तुत बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 को पारित कर दिया गया है। यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 और बैंकिंग कंपनियों (अधिग्रहण और अंतरण) अधिनियम, 1970 तथा 1980 में संशोधन करता है। विधेयक में “पाक्षिक अवधि” की परिभाषा में बदलाव कर इसे प्रत्येक माह की 1 से 15 तारीख तथा 16 से माह के अंतिम दिन तक के दो हिस्सों में बांटा गया है। सहकारी बैंकों में निदेशकों के कार्यकाल को 8 से बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय सहकारी बैंकों के निदेशकों को राज्य सहकारी बैंक के बोर्ड में सदस्यता की स्थिति में दूसरी बैंक में निदेशक बनने की छूट दी गई है। किसी कंपनी में “पर्याप्त हित” की सीमा भी 5 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दी गई है। अब जमा खातों या लॉकरों के लिए चार तक नामित व्यक्तियों की नियुक्ति की जा सकती है। सात वर्षों तक बिना दावा किए गए लाभांश, ब्याज या शेयर अब निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष में स्थानांतरित किए जाएंगे, और हितधारक पुनः दावा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बैंकों के लेखापरीक्षकों के पारिश्रमिक निर्धारण का अधिकार अब बैंकों को सौंप दिया गया है, जो पहले भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था।