Category: न्यायिक निर्णय
प्रिवी पर्स की गारंटी
H. H. MAHARAJADIDRAJA MADHAV RAO JIWAJI RAO SCINDIA BAHADUR & ORS. .v/s UNION OF INDIA December 15, 1970 यह मामला तब उत्पन्न हुआ जब भारत के राष्ट्रपति ने, संविधान के 24वें संशोधन विधेयक (1970) के राज्यसभा में विफल होने के पश्चात, एक आदेश जारी कर भारत के सभी पूर्व रियासतों के शासकों की मान्यता को […]
Continue ReadingMP Judicial Service Rules, 1994 के नियम 6A में 2023 संशोधन, जिसमें दृष्टिबाधित एवं अल्पदृष्टि अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया था, को संविधान के विरुद्ध करार देते हुए निरस्त कर दिया गया।
IN RE: RECRUITMENT OF VISUALLY IMPAIRED IN JUDICIAL SERVICES बनाम —SCR उद्धरण: [2025] 4 S.C.R. 222निर्णय दिनांक: 03 मार्च 2025न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति आर. महादेवनप्रकरण प्रकार: स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) /2/2024निर्णय: याचिका का निपटारान्यूट्रल सिटेशन: 2025 INSC 300 मुख्य बिंदु (हेडनोट): न्यायिक सेवा – दृष्टिबाधितों की नियुक्ति –MP Judicial Service Rules, 1994 के नियम […]
Continue ReadingCBI की क्षेत्राधिकारिता एवं कानूनी स्थायित्व
THE STATE, CENTRAL BUREAU OF INVESTIGATION vs. A. SATISH KUMAR & ORS. SCR Citation: [2025] 1 S.C.R. 130 यह मामला उन प्राथमिकी (FIR) और जांचों से संबंधित है जो सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत दर्ज की गई थीं। ये आरोप उत्तरदाताओं पर लगे थे, जो आंध्र प्रदेश राज्य में […]
Continue Readingसुप्रीम कोर्ट ने सिविल विवाद को आपराधिक रंग देने पर लगाई रोक अपीलकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी रद्द
उच्चतम न्यायालय ने Jit Vinayak Arolkar बनाम State of Goa and Others, [2025] 1 S.C.R. 230 के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 415 और 420 की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया जिसमें कहा गया कि सिविल विवाद को आपराधिक मामला बनाकर न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। इस मामले […]
Continue Readingसऊदी अरब में ड्रग अपराधों के लिए फांसी में वृद्धि: परिवारों की चिंता और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल की 25 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच सऊदी अरब में कम से कम 88 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें से 52 को ड्रग से संबंधित अपराधों के लिए दंडित किया गया। इस तेज़ वृद्धि ने मानवाधिकार संगठनों और मृत्युदंड के विरोधियों के बीच गहरी चिंता […]
Continue Readingविदेशी नागरिक Frank Vitus की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला ऐतिहासिक निर्णय
उच्चतम न्यायालय ने Frank Vitus बनाम Narcotics Control Bureau and Others, [2025] 1 S.C.R. 184 के मामले में विदेशी नागरिकों की जमानत और डिजिटल निगरानी से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्नों पर निर्णय सुनाया। Frank Vitus नामक एक विदेशी नागरिक को भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर आरोपों के तहत नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक […]
Continue Readingवसीयत की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला धारा 63(c) की स्पष्ट व्याख्या
उच्चतम न्यायालय ने Gopal Krishan and Others बनाम Daulat Ram and Others, [2025] 1 S.C.R. 93 के मामले में वसीयत की वैधता से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर निर्णय सुनाते हुए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 63(c) की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। इस मामले में वसीयतकर्ता एस आर जो एक भूस्वामी था और जिसकी […]
Continue Readingभूमि अधिग्रहण में देरी और प्रतिकर के अधिकार पर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय
उच्चतम न्यायालय ने Bernard Francis Joseph Vaz and Others बनाम Government of Karnataka and Others, [2025] 1 S.C.R. 190 में भूमि अधिग्रहण और प्रतिकर में देरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस मामले में अपीलकर्ताओं ने वर्ष 1995 से 1997 के बीच विभिन्न आवासीय भूखंड खरीदे थे जिनका दिनांक 29 जनवरी […]
Continue Readingघोषित अपराधी की स्थिति में स्वतंत्र अपराध की वैधता पर उच्चतम न्यायालय का स्पष्ट निर्णय
उच्चतम न्यायालय ने Daljit Singh बनाम State of Haryana & Another, [2025] 1 S.C.R. 117 के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 174A और दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 82 की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। इस मामले में अपीलकर्ता को अदालत द्वारा समन भेजे जाने के बावजूद अनुपस्थित रहने पर धारा […]
Continue Readingएफआईआर में अपराध की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक अन्यथा निरस्तीकरण योग्य उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
उच्चतम न्यायालय ने B.N. JOHN बनाम STATE OF U.P. & ANR., [2025] 1 S.C.R. 12 के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 195 और 155 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 353 और 186 का विस्तार से व्याख्या की गई है। अपीलकर्ता जो एक छात्रावास का मालिक था ने […]
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