न्यायपालिका की पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का संघर्ष: RTI कानून के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की जवाबदेही

Central Public Information Officer, Supreme Court of India बनाम Subhash Chandra Agarwalन्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालयनिर्णय तिथि: 13 नवम्बर 2019सिविल अपील सं. 10044, 10045, 2683 / 2010 मुख्य मुद्दे: प्रासंगिक विधिक प्रावधान: RTI अधिनियम, 2005: धारा 2(h): लोक प्राधिकारी की परिभाषा धारा 2(f): सूचना की परिभाषा धारा 8(1)(e): फिड्युशियरी संबंध में प्राप्त सूचना का अपवाद […]

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धार्मिक आस्था बनाम संवैधानिक समानता – सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पुनर्विचार

Kantaru Rajeevaru बनाम Indian Young Lawyers Association व अन्य(Review Petition (Civil) No. 3358/2018 in WP (C) No. 373/2006) मुख्य मुद्दे (Substantial Issues): प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधान (Relevant Constitutional Provisions): अनुच्छेद 25(1): सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 26: धार्मिक सम्प्रदायों को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन अनुच्छेद 14: समानता का […]

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छत्तीसगढ़ रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान करती है, संविधान के अंतर्गत वैध है या नहीं

राजेन्द्र दीवान बनाम प्रदीप कुमार रानीबाला एवं अन्य[सिविल अपील संख्या 3613/2016, निर्णय दिनांक 10 दिसंबर 2019] मुख्य विवाद/प्रमुख मुद्दा: क्या छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम, 2011 की धारा 13(2), जो छत्तीसगढ़ रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान करती है, संविधान के अंतर्गत वैध है या नहीं?  याचिकाकर्ता की […]

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“क्या सूचनाकर्ता ही जांचकर्ता हो सकता है? – एनडीपीएस अधिनियम में निष्पक्षता और न्याय की संवैधानिक कसौटी पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय”

Mukesh Singh v. State (Narcotic Branch of Delhi), [2020] 9 SCR 245Special Leave Petition (Criminal) Diary No. 39528 of 2018 एनडीपीएस मामलों में सूचनाकर्ता द्वारा जांच – निष्पक्षता बनाम वैधानिक अनुमति निर्णायक पीठ: पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ:न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा,न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी,न्यायमूर्ति विनीत सरन,न्यायमूर्ति एम. आर. शाह (मुख्य निर्णय लेखक),न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट। मूल मुद्दा:क्या […]

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“आरक्षण में योग्यता बनाम श्रेणीबद्धता: क्षैतिज और ऊर्ध्व आरक्षण में खुली श्रेणी में चयन का संवैधानिक मानदंड”

SAURAV YADAV & ORS. v. STATE OF UTTAR PRADESH & ORS. (2020) 11 SCR 281 | Misc. Appl. No. 2641/2019 in SLP (C) No. 23223/2018 मुख्य मुद्दा:उत्तर प्रदेश पुलिस में 2013 की भर्ती में ‘OBC महिला’ और ‘SC महिला’ उम्मीदवारों द्वारा ‘जनरल महिला’ श्रेणी में चयन का दावा किया गया था, क्योंकि उनकी अंक संख्या […]

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अमेरिकी संघीय न्यायालय ने कानून फर्म के खिलाफ कार्यकारी आदेश को स्थायी रूप से किया रद्द

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एक प्रमुख कार्यकारी आदेश को स्थायी रूप से निरस्त कर दिया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क़ानून फर्म जेनर एंड ब्लॉक एलएलपी को लक्षित करते हुए जारी किया गया था। यह निर्णय अमेरिका के जिला न्यायाधीश जॉन डी. बेट्स द्वारा सुनाया गया, जिन्होंने पाया कि यह आदेश संविधान […]

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चयन सूची को रद्द करना सरकारी विवेक का विषय: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का हस्तक्षेप असंगत माना

State of Assam & Ors. v. Arabinda Rabha & Ors.[2025] 3 S.C.R. 598 सुप्रीम कोर्ट ने सेवा संबंधी मामलों में चयन सूची के रद्दीकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि जब तक चयन प्रक्रिया को सरकार की विधिसम्मत स्वीकृति प्राप्त न हो, तब तक उसे किसी प्रत्याशी का अधिकार नहीं माना […]

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निर्णय की वैधता निष्पादन न्यायालय नहीं जांच सकता: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश रद्द कर छह माह में निष्पादन का निर्देश दोहराया

Periyammal (Dead) through LRs & Ors. v. V. Rajamani & Anr. etc.[2025] 3 S.C.R. 540 सुप्रीम कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXI नियम 97 और 101 तथा धारा 47 की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि निष्पादन न्यायालय का कार्य केवल डिक्री के निष्पादन तक सीमित होता है, वह डिक्री की वैधता […]

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POCSO और IPC दोनों लागू होने पर कठोर दंड को वरीयता: सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी

Gyanendra Singh @ Raja Singh v. State of U.P.[2025] 3 S.C.R. 490 सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में भारतीय दंड संहिता और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) दोनों के प्रावधान लागू होते हैं, तो POCSO अधिनियम की धारा 42 के अनुसार उस प्रावधान को […]

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जानकारी छिपाकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: औरोविल फाउंडेशन को ₹50,000 का जुर्माना

The Auroville Foundation v. Natasha Storey[2025] 3 S.C.R. 469 सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल उस रिट याचिका को निरस्त कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता ने पूर्व में इसी विषय पर दायर याचिका की अस्वीकृति की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता, “clean hands” और “non-suppression of […]

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