अभियुक्त को स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए विवश करने से सुरक्षा

THE STATE OF BOMBAY v/s KATHI KALU OGHAD AND OTHERS AIR 1961 SC 1808; [1962] 3 SCR 10 इस संविधान पीठ के निर्णय में भारत के संविधान के अनुच्छेद 20(3) के दायरे को स्पष्ट किया गया, जो अभियुक्त को स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए विवश करने से सुरक्षा प्रदान करता है। यह मामला […]

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संसद को संविधान के भाग III में वर्णित मौलिक अधिकारों को संशोधित करने की शक्ति नहीं है

I C. GOLAK NATH & ORS. v. STATE OF PUNJAB & ANRS February 27, 1967 संक्षिप्त सारांश:इस ऐतिहासिक निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने यह तय किया कि संसद को संविधान के भाग III में वर्णित मौलिक अधिकारों को संशोधित करने की शक्ति नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने पंजाब भूमि धारणा सुरक्षा अधिनियम, 1953 और मैसूर भूमि […]

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बैंक राष्ट्रीयकरण मामला

RUSTOM CAVASJEE COOPER v. UNION OF INDIA February 10, 1970 इस ऐतिहासिक फैसले को “बैंक राष्ट्रीयकरण मामला” (Bank Nationalization Case) भी कहा जाता है। इसमें Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act, 1969 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसके माध्यम से भारत सरकार ने 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। […]

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प्रिवी पर्स की गारंटी

H. H. MAHARAJADIDRAJA MADHAV RAO JIWAJI RAO SCINDIA BAHADUR & ORS. .v/s UNION OF INDIA December 15, 1970 यह मामला तब उत्पन्न हुआ जब भारत के राष्ट्रपति ने, संविधान के 24वें संशोधन विधेयक (1970) के राज्यसभा में विफल होने के पश्चात, एक आदेश जारी कर भारत के सभी पूर्व रियासतों के शासकों की मान्यता को […]

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निजी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के संवैधानिक अधिकार

T.M.A. Pai Foundation & Others v. State of Karnataka & Others, [(2002) 8 SCC 481] – Constitution Bench Judgment decided on October 31, 2002 टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन एवं अन्य बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य, [(2002) 8 SCC 481] – यह संविधान पीठ का निर्णय है, जो 31 अक्टूबर 2002 को पारित किया गया। सारांश:यह ऐतिहासिक […]

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सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद की संविधान संशोधन शक्ति की सीमाओं को स्पष्ट किया

His Holiness Kesavananda Bharati Sripadagalavaru v. State of Kerala, decided on April 24, 1973, by a 13-judge Constitution Bench इस ऐतिहासिक निर्णय में, सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद की संविधान संशोधन शक्ति की सीमाओं को स्पष्ट किया। यह मामला संविधान के 24वें, 25वें और 29वें संशोधन की वैधता को चुनौती […]

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कश्मीर के नाम पर पाकिस्तान की सेना का झूठा राष्ट्रवाद: पाकिस्तान को तबाह करने की साजिश

पाकिस्तान की सेना द्वारा कश्मीर मुद्दे पर फैलाया जा रहा झूठा राष्ट्रवाद न केवल भारत के विरुद्ध उकसावे की राजनीति को जन्म देता है, बल्कि स्वयं पाकिस्तान के नागरिकों को भी गहरे भ्रम में डालता है। जनरल असीम मुनीर की हालिया भड़काऊ बयानबाजी इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान की तथाकथित ‘DEEP स्टेट’ यानी […]

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क्या सरकारी पद के दुरुपयोग के आरोपों से संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच (preliminary inquiry) अनिवार्य है।

PRADEEP NIRANKARNATH SHARMA बनाम STATE OF GUJARAT & ORS.SCR उद्धरण: [2025] 4 S.C.R. 32तारीख: 17 मार्च 2025न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति विक्रम नाथप्रकरण प्रकार: आपराधिक अपील /1313/2025निर्णय: अपील खारिजन्यूट्रल सिटेशन: 2025 INSC 350 मुख्य बिंदु (हेडनोट) — दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 – धारा 154 –अपीलकर्ता ने Lalita Kumari v. Government of Uttar Pradesh & Ors. पर […]

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दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 — यह प्रश्न कि क्या उच्च न्यायालय द्वारा Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 सहपठित धारा 141 के अंतर्गत आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने हेतु दायर याचिका को खारिज करना न्यायसंगत है

K.S. MEHTA बनाम M/S MORGAN SECURITIES AND CREDITS PVT. LTD. SCR उद्धरण: [2025] 4 S.C.R. 1तारीख: 04 मार्च 2025न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्माप्रकरण प्रकार: आपराधिक अपील सं. 1105/2025निर्णय: अपील स्वीकृतन्यूट्रल सिटेशन: 2025 INSC 315 मुख्य बिंदु (हैडनोट) — निर्णय: विवाद एक Inter-Corporate Deposit (ICD) समझौते से उत्पन्न हुआ था जो आरोपी कंपनी और […]

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समन आदेश तथा शिकायत दोनों को रद्द किया गया

VISHNOO MITTAL बनाम M/S SHAKTI TRADING COMPANYSCR उद्धरण: [2025] 4 S.C.R. 41तारीख: 17 मार्च 2025न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति सुधांशु धूलियाप्रकरण प्रकार: आपराधिक अपील /1287/2025निर्णय: अपील स्वीकार की गईन्यूट्रल सिटेशन: 2025 INSC 346 मुख्य बिंदु (हेडनोट) — दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 – धारा 482,परिचालित लिखत अधिनियम, 1881 – धारा 138,दीवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 – धारा […]

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